लखनऊ , मार्च 17 -- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अवध प्रांत संघचालक सरदार स्वर्ण सिंह ने कहा कि देश में "राष्ट्र प्रथम" का भाव और "पंच परिवर्तन" का स्वभाव विकसित होना चाहिए।
मंगलवार को जियामऊ स्थित विश्व संवाद केंद्र में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए सरदार स्वर्ण सिंह ने बीते दिनों हरियाणा के समालखा में सम्पन्न हुई अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में संगठन विस्तार, समाज की सज्जन शक्ति की सक्रिय भागीदारी और सामाजिक समरसता जैसे विषयों के बारे में जानकारी दी।
इस दौरान संत रविदास के 650वें प्राकट्य वर्ष के अवसर पर जारी संदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने समाज में एकता और समरसता को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। स्वर्ण सिंह ने कहा कि महापुरुषों के विचारों को जाति-पंथ से ऊपर उठकर स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने बताया कि गुरु तेग बहादुर जी के 350वें बलिदान वर्ष पर देशभर में 2000 से अधिक कार्यक्रम हुए, जिनमें अवध प्रांत में 24 स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित कर 10 हजार से अधिक लोगों की सहभागिता रही।
सह प्रांत कार्यवाह संजय सिंह ने बताया कि शताब्दी वर्ष के तहत देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है, जिसमें समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है। गृह संपर्क, सद्भाव बैठकों और नागरिक गोष्ठियों के माध्यम से संगठन के विचार घर-घर तक पहुंच रहे हैं।
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