नयी दिल्ली , सितंबर 25 -- केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान (एनआईएसडी) ने यहां बुजुर्गों की देखभाल संबंधी ("जेरियाट्रिक केयर प्रोवाइडर") जॉब रोल के लिए मास्टर ट्रेनर के वास्ते 11-दिन का 'ट्रेनिंग ऑफ़ ट्रेनर्स' (टीओटी) कार्यक्रम आयोजित किया है।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार मंत्रालय के एनआईएसडी के वरिष्ठ नागरिक डिवीजन ने इसका आयोजन सात से 18 सितंबर 2026 तक किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बुजुर्गों की देखभाल के प्रशिक्षण में गुणवत्ता, मानकीकरण और पेशेवर क्षमता को मजबूत करना था। इसका उद्देश्य प्रशिक्षित और प्रमाणित मास्टर ट्रेनर का राष्ट्रीय पूल तैयार करना भी था, जो देश भर में बुजुर्गों की देखभाल करने वालों को उच्च-गुणवत्ता वाला और क्षमता-आधारित प्रशिक्षण देने में सक्षम हों।

एनआईएसडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस कार्यक्रम में अलग-अलग पेशेवर पृष्ठभूमि वाले प्रतिभागी शामिल हुए। उनमें जीएनएम, बीएससी, नर्सिंग, पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग, एमएससी नर्सिंग और एमबीबीएस शामिल थे। इससे बुजुर्गों की देखभाल, स्वास्थ्य और भलाई से जुड़े कई क्षेत्रों को मिलाकर सीखने का वातावरण बना।

उद्घाटन सत्र के दौरान, एनआईएसडी के वरिष्ठ नागरिक डिवीजन के उप निदेशक डॉ. एच.सी. श्रीधरा चन्नाकेशव रंगा रेड्डी ने 'ट्रेनिंग ऑफ़ ट्रेनर्स' प्रोग्राम के उद्देश्यों और महत्व के बारे में जानकारी दी।

डॉ. रंगा रेड्डी ने मास्टर ट्रेनर से अपेक्षित भूमिकाओं, जिम्मेदारियों, गुणों और क्षमताओं के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने क्षमता-आधारित जेरियाट्रिक केयर (बुजुर्गों की देखभाल) ट्रेनिंग को प्रभावी ढंग से देने के लिए डोमेन स्किल्स और प्लेटफॉर्म स्किल्स को एक साथ लाने के महत्व पर बल दिया।

एनआईएसडी के अधिकारी ने बताया कि टीओटी प्रोग्राम को दो मुख्य हिस्सों - डोमेन स्किल्स और प्लेटफॉर्म स्किल्स - के आधार पर तैयार किया गया। उन्होंने कहा कि डोमेन स्किल्स वाला हिस्सा जेरियाट्रिक केयर प्रोवाइडर की नौकरी के लिए ज़रूरी पेशेवर क्षमताओं पर केंद्रित था। प्लेटफॉर्म स्किल्स ने बातचीत, सुविधा प्रदान करने, निर्देश देने, सीखने वालों को शामिल करने, प्रशिक्षण के तरीकों और मूल्यांकन के तरीकों में प्रतिभागियों की क्षमताओं को बेहतर बनाया।

अधिकारी ने यह भी बताया कि इस प्रोग्राम में बुजुर्गों की देखभाल से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया। इनमें शारीरिक प्रणाली में उम्र के साथ होने वाले बदलाव और उनसे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं, स्वस्थ और सक्रिय बुढ़ापा, देखभाल के तरीके; बचाव वाली स्वास्थ्य सेवा; बुजुर्गों का पोषण; बातचीत और साथ, डिमेंशिया की देखभाल, बुजुर्गों की मानसिक सेहत, गैर-संक्रामक बीमारियों से बचाव और उनका प्रबंधन, सम्मान के साथ बुढ़ापा, प्राथमिक उपचार और आपातकालीन देखभाल, योग और ध्यान, देखभाल करने वाले का अपना ध्यान रखना और नौकरी के लिए ज़रूरी कौशल शामिल थे।

उन्होंने बताया कि प्रतिभागियों को मूल्यांकन की ज़रूरतों, दस्तावेजीकरण के तरीकों, योग्यता के मानकों और प्रमाणन की प्रक्रियाओं के बारे में भी जानकारी दी गयी। इस दौरान बुजुर्गों की देखभाल के प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने में एकरूपता, निरंतरता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर बल दिया गया।

विशेषज्ञों के नेतृत्व वाली और भागीदारी पर आधारित प्रशिक्षण पद्धति के बारे में, अधिकारी ने बताया कि बुजुर्गों की देखभाल और उससे जुड़े क्षेत्रों के विशेषज्ञों और रिसोर्स पर्सन्स के विशेष पैनल ने पूरे कार्यक्रम के दौरान विशेष और अंत:संवाद सत्र आयोजित किये।

सुश्री जैस्मीन हुसैन ने 'प्लेटफ़ॉर्म स्किल्स' पर सत्र आयोजित किये, जबकि डॉ. गहन एस. जॉइस, डॉ. के.एस. बघोटिया, श्री प्रेम पोद्दार, श्री अरविंद नारायणन, श्री आर. नरेंद्र, श्री विष्णु शंकर, सुश्री दीपिका शर्मा, सुश्री सुधा झिजारिया और सुश्री तेजस्विनी ने अलग-अलग डोमेन स्किल क्षेत्रों पर सत्र आयोजित किए। इनमें डिमेंशिया की देखभाल और प्रबंधन, मानसिक स्वास्थ्य, गैर-संक्रामक बीमारियों से बचाव और नियंत्रण, सम्मान के साथ बुढ़ापा, योग, ध्यान, और प्राथमिक उपचार और आपातकालीन देखभाल जैसे विषय शामिल थे। एनआईएसडी के अधिकारी ने बताया कि प्रशिक्षण में भागीदारी, योग्यता और प्रैक्टिस पर आधारित तरीका अपनाया गया।

इसमें विशेषज्ञों के लेक्चर, इंटरैक्टिव चर्चा, रोल प्ले, प्रैक्टिकल एक्सरसाइज़, प्रैक्टिकल डेमो, समूह गतिविधि, केस-आधारित लर्निंग और अनुभव साझा करना शामिल था। उन्होंने कहा कि इस तरीके को न केवल प्रतिभागियों की तकनीकी जानकारी को मज़बूत करने के लिए, बल्कि भविष्य में बुजुर्गों की देखभाल करने वालों को प्रभावी ढंग से जानकारी और कौशल सिखाने की उनकी क्षमता को बढ़ाने के लिए भी डिज़ाइन किया गया था।

अधिकारी ने बताया कि प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट वितरित करने के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों ने व्यवस्थित, इंटरैक्टिव और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के तरीके पर संतोष प्रकट किया। उन्होंने पेशेवर मानकों को मजबूत करने और बुजुर्गों की देखभाल के प्रशिक्षण की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में इसके महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम बुजुर्गों के लिए सम्मानजनक, संवेदनशील और उत्कृष्ट देखभाल को बढ़ावा देने और भारत में मजबूत और पेशेवर देखभाल पारितंत्र के विकास में मदद करने के लिए एनआईएसडी की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।

अधिकारी ने कहा कि 'ट्रेनिंग ऑफ़ ट्रेनर्स प्रोग्राम' जैसी योजनाओं के माध्यम से, राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान बुजुर्गों की देखभाल के क्षेत्र में क्षमता विकास, कौशल विकास और मानकीकरण को बढ़ावा देना जारी रखे हुए है। यह पहल कुशल, सर्टिफाइड और गुणवत्ता उन्मुख जेरियाट्रिक केयर वर्कफोर्स (बुजुर्गों की देखभाल करने वाले कर्मचारियों) को तैयार करने में योगदान देती है, जो भारत की बढ़ती बुजुर्ग आबादी की बदलती देखभाल जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है।

एनआईएसडी को राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) ने 'अवार्डिंग बॉडी' के रूप में मान्यता दी है। यह समाज रक्षा के क्षेत्र में, विशेष रूप से बुजुर्गों की देखभाल के क्षेत्र में, व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण पारिस्थितिकी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित