नयी दिल्ली , मई 19 -- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ( एनएचआरसी) ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा और उनके कल्याण को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एडवाइजरी 2.0 जारी की है।
एनएचआरसी ने मंगलवार को बताया कि यह एडवाइजरी केंद्र सरकार के 11 मंत्रालयों, रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय तथा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों एवं प्रशासकों को भेजी गई है।आयोग ने यह एडवाइजरी वर्ष 2023 में जारी पूर्व सलाह के क्रम में जारी की है।
आयोग ने कहा कि पिछली एडवाइजरी पर संबंधित विभागों की सकारात्मक प्रतिक्रिया और सरकार की ओर से उठाए गए कदम उत्साहजनक रहे हैं। एनएचआरसी ने क्षेत्रीय संवाद, हितधारकों से परामर्श और विभिन्न योजनाओं की समीक्षा के आधार पर पाया कि ट्रांसजेंडर समुदाय अब भी शिक्षा, स्वास्थ्य, संपत्ति अधिकार, कानूनी सुरक्षा और रोजगार जैसे कई क्षेत्रों में चुनौतियों का सामना कर रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए आयोग ने नई सिफारिशें जारी की हैं और सभी संबंधित विभागों से दो महीने के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) मांगी है।
एडवाइजरी में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के कल्याण के लिए 10 प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया गया है। इनमें राष्ट्रीय आंकड़ा प्रणाली में लैंगिक विविधता को शामिल करना, कानूनों और नीतियों की समीक्षा, समावेशी कानूनी ढांचा तैयार करना, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में समान अवसर, कार्यस्थलों पर समावेशिता, बुजुर्ग ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा तथा गरिमा गृह आश्रयों को मजबूत करना शामिल है।
एनएचआरसी ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को संपत्ति, उत्तराधिकार, आवास और विरासत में समान अधिकार देने पर जोर दिया है। साथ ही पुलिस और जेल प्रशासन के लिए गिरफ्तारी, हिरासत, पूछताछ और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने की भी सिफारिश की है।
आयोग ने ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए अलग कानूनी सहायता केंद्र, हेल्पलाइन और स्वतंत्र शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने की जरूरत बताई है ताकि भेदभाव, हिंसा और हिरासत में उत्पीड़न के मामलों में उन्हें सहायता मिल सके। शिक्षा के क्षेत्र में आयोग ने सुझाव दिया है कि ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों को उनकी स्व-पहचान के आधार पर प्रवेश दिया जाए और इसके लिए मेडिकल प्रमाण की अनिवार्यता समाप्त की जाए। साथ ही स्कूलों और कॉलेजों में जेंडर-न्यूट्रल सुविधाएं तथा शिकायत निवारण तंत्र विकसित करने की बात कही गई है।
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