लुधियाना , जुलाई 10 -- राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस (नेशनल फिश फार्मर्स डे) के अवसर पर कॉलेज ऑफ फिशरीज ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष-2026 के अनुरूप विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य कर रही छह महिला मत्स्य उद्यमियों को सम्मानित किया। सम्मानित महिलाओं ने मत्स्य पालन, अंतर्देशीय लवणीय क्षेत्रों में झींगा पालन, सजावटी मछली पालन, मत्स्य पालन सह एक्वा टूरिज्म, एकीकृत मत्स्य पालन तथा बायोफ्लॉक एक्वाकल्चर जैसे क्षेत्रों में सफलता हासिल की है। कार्यक्रम में इन महिला उद्यमियों ने कॉलेज के स्नातक विद्यार्थियों के साथ अपने संघर्ष और सफलता के अनुभव साझा करते हुए बताया कि सही सोच, तकनीकी जानकारी और निरंतर प्रयास से मत्स्य पालन क्षेत्र में स्वरोजगार और उद्यमिता की अपार संभावनाएं हैं।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. जे.पी.एस. गिल ने शुक्रवार को कहा कि कृषि एवं खाद्य प्रणाली में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि भारत में लगभग 2.80 करोड़ मछुआरों और मत्स्य पालकों में 44.28 प्रतिशत (करीब 1.24 करोड़) महिलाएं हैं, जो उत्पादन से लेकर विपणन तक मत्स्य क्षेत्र की पूरी मूल्य श्रृंखला में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय महिलाओं को तकनीकी प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और मूल्य संवर्धन संबंधी नि:शुल्क कार्यक्रमों के माध्यम से लगातार प्रोत्साहित कर रहा है।
कार्यक्रम के दौरान एक शैक्षणिक सूचना केंद्र तथा जीवित खाद्य एवं सजावटी मछलियों की प्रदर्शनी भी लगायी गयी। इसमें करीब 250 वरिष्ठ माध्यमिक विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों ने भाग लिया। विद्यार्थियों को मत्स्य क्षेत्र की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा, रोजगार सृजन, आजीविका के अवसर और देश की आर्थिक प्रगति में इसकी भूमिका के बारे में जानकारी दी गयी।
इसके अलावा विद्यार्थियों को मत्स्य विज्ञान से जुड़े शैक्षणिक पाठ्यक्रमों, भारत और विदेश में उपलब्ध करियर संभावनाओं तथा मत्स्य उद्योग में उद्यमिता के अवसरों से भी अवगत कराया गया। कार्यक्रम को रोचक बनाने के लिए 'ब्लू रिवोल्यूशन में महिलाओं का योगदान' और 'मत्स्य किसानों को सशक्त बनाने के लिए मछली उपभोग को बढ़ावा दें' विषयों पर विभिन्न प्रतियोगिताएं और मनोरंजक गतिविधियां भी आयोजित की गयीं।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस प्रतिवर्ष 10 जुलाई को मनाया जाता है। इसी दिन वर्ष 1957 में डॉ. एच.एल. चौधरी और डॉ. के.एच. अलीकुन्ही ने प्रेरित प्रजनन तकनीक के माध्यम से पहली बार मीठे पानी की कार्प मछली का सफल कृत्रिम प्रजनन कराया था, जिसे भारत की ब्लू रिवोल्यूशन की शुरुआत माना जाता है।
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