, Jan. 20 -- नयी दिल्ली 20 जनवरी वार्ता राष्ट्रीय बांध सुरक्षा समिति (एनसीडीएस) की 11वीं बैठक मंगलवार को यहाँ आयोजित की गयी जिसमें असम, कर्नाटक, महाराष्ट्र, सहित सात राज्यों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

राष्ट्रीय बांध सुरक्षा समिति (एनसीडीएस) की 11वीं बैठक यहाँ आयोजित की गई। बैठक में जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनरुद्धार विभाग, केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए), पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफएंडसीसी), भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ऑफ इंडिया (जीएसआई), राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र (एनआरएससी), तथा राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (एनडीएसए) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय बांध सुरक्षा समिति के अध्यक्ष अनुपम प्रसाद ने की। राष्ट्रीय बांध सुरक्षा समिति (एनसीडीएस) का गठन बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 की धारा 5 के तहत किया गया है। समिति के कार्य अधिनियम के प्रथम अनुसूची में वर्णित हैं। एनसीडीएस राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (एनडीएसए) के लिए पालिसी थिंक टैंक के रूप में कार्य करती है तथा बांध सुरक्षा से संबंधित नीतियों पर विचार-विमर्श करती है और बांध सुरक्षा के समान मानकों को सुनिश्चित करने एवं बांध विफलता से उत्पन्न होने वाली आपदाओं को रोकने के लिए आवश्यक विनियमों की सिफारिश करती है।

श्री प्रसाद ने एनडीएसए के पिछले चार वर्षों की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बांध सुरक्षा के क्षेत्र में उभरती चुनौतियों, बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के तहत बांध मालिकों पर रखी गई व्यापक वैधानिक जिम्मेदारियों तथा बांध स्वामित्व एजेंसियों में इन-हाउस क्षमता निर्माण की मौजूदा कमी पर ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने इन चुनौतियों का सामना करने के लिए एनडीएसए द्वारा उठाए गए विभिन्न पहलों का भी उल्लेख किया।

अध्यक्ष ने जोर दिया कि बांध सुरक्षा अधिनियम का सफल कार्यान्वयन हितधारकों के बीच प्रभावी सहयोग, तकनीकी उत्कृष्टता एवं निरंतर सामूहिक प्रतिबद्धता पर निर्भर करता है।

बैठक का समापन संस्थागत ढांचे को और मजबूत करने, बांध सुरक्षा अधिनियम के कार्यान्वयन को त्वरित करने तथा बांधों की दीर्घकालिक सुरक्षा एवं स्थिरता सुनिश्चित करने के संकल्प के साथ हुआ, जिससे जल सुरक्षा, सिंचाई, बिजली उत्पादन एवं बाढ़ नियंत्रण से जुड़े उद्देश्यों का समर्थन होगा।

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