उदयपुर , सितम्बर 13 -- राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ ने कहा है कि वर्तमान में राष्ट्रीय पहचान को लेकर जिस प्रकार का संकट दिखाई दे रहा है, उस पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता है।

श्री राठौड़ रविवार शाम को यहां पाथेय कण संस्थान, विश्व संवाद केंद्र एवं रवींद्रनाथ टैगोर आयुर्विज्ञान महाविद्यालय उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में हस्तीमल व्याख्यानमाला के तहत 'हम भारत के लोग' विषयक व्याख्यान कार्यक्रम को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पाथेय कण संस्थान के अध्यक्ष एवं हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो नंदकिशोर पांडे ने की। रवीन्द्रनाथ टैगोर आयुर्विज्ञान महाविद्यालय उदयपुर के प्राचार्य एवं नियंत्रक डॉ राहुल जैन एवं विश्व संवाद केंद्र उदयपुर के अध्यक्ष कमल प्रकाश रोहिला भी उपस्थित रहे।

श्री राठौड़ ने कहा कि आज दुनिया के सामने यह प्रश्न महत्वपूर्ण बन गया है कि 'हम कौन हैं।" भारत के संदर्भ में भी हमें विचार करना होगा कि 'मैं' से 'हम' कैसे बने और 'हम' की अनुभूति का आधार क्या है!उन्होंने भारतीय दर्शन और उपनिषदों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि संसार में दिखाई देने वाली प्रत्येक वस्तु में ईश्वर के अंश को देखने की दृष्टि प्रदान करती है। त्यागपूर्ण जीवन और समष्टि के प्रति संवेदनशीलता से ही 'मैं' से 'हम' की यात्रा प्रारंभ होती है।

श्री राठौड़ ने कहा कि भारत का चिंतन केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार, समाज और संपूर्ण विश्व को एक इकाई के रूप में देखने की दृष्टि देता है। भारत में कुटुंब भाव इसी चिंतन का परिणाम है। त्याग और अपनत्व से परिवार का निर्माण होता है और यही भावना आगे बढ़कर 'वसुधैव कुटुम्बकम्' के रूप में संपूर्ण विश्व को अपना परिवार मानने की प्रेरणा देती है।

भारत की ऐतिहासिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए श्री राठौड़ ने कहा कि भारत ने दुनिया को शस्त्रों के माध्यम से प्रभावित नहीं किया, बल्कि ज्ञान, शिक्षा, संस्कृति, वेदों और अपने चरित्र के माध्यम से विश्व को प्रभावित किया है।

पाथेय कण संस्थान के सचिव महेंद्र सिंहल ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए पाथेय कण संस्थान की यात्रा और उसकी गतिविधियों की जानकारी दी।

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