नयी दिल्ली , मई 30 -- राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) को वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान जैव संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग की सुविधा और लाभ साझाकरण (एबीएस) व्यवस्था के अंर्तगत 21.26 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की शनिवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार यह राशि अनुसंधान, वाणिज्यिक उपयोग, बौद्धिक संपदा अधिकार, जैव सर्वेक्षण और जैविक संसाधनों के जैव उपयोग के लिए दी गई स्वीकृतियों से प्राप्त हुई है और देश के जैव विविधता शासन ढांचे में उद्योग की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है।
एबीएस की व्यवस्था यह सुनिश्चित करने के लिए है कि जैविक संसाधनों के उपयोग से प्राप्त लाभ स्थानीय समुदायों, जैव विविधता प्रबंधन समितियों, किसानों और पारंपरिक ज्ञान धारकों के साथ निष्पक्ष और समान रूप से साझा किए जाएं। इससे प्राप्त धनराशि जैव विविधता संरक्षण, जैविक संसाधनों के सतत उपयोग और जमीनी स्तर पर आजीविका संवर्धन में प्रत्यक्ष रूप से योगदान देती है।
विज्ञप्ति के अनुसार 31 मार्च 2026 को समाप्त पिछले वित्त वर्ष में प्राधिकरण की इन प्राप्तियों में बीज क्षेत्र का योगदान 11.75 करोड़ रुपये के साथ सबसे अधिक रहा। इसके बाद आयुष क्षेत्र का है जिसका योगदान 5.56 करोड़ रुपये रहा। अन्य योगदानकर्ताओं में न्यूट्रास्यूटिकल्स (पौष्टिकऔषधि ) क्षेत्र ने 1.40 करोड़ रुपये और औषधि क्षेत्र ने 1.18 करोड़ रुपये का योगदान किया। इस दौरान प्राधिकरण को जैव प्रौद्योगिकी, सौंदर्य प्रसाधन, रसायन, जैव ईंधन और खाद्य एवं पेय पदार्थों का कारोबार करने वाली इकाइयों से भी एबीएस निधि प्राप्त हुई।
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