हैदराबाद , सितंबर 11 -- तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से मांग की कि सामाजिक असमानताओं की पहचान करने और कमजोर वर्गों के बीच संसाधनों और अवसरों का समान वितरण सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय जनगणना में जातिगत जनगणना को भी शामिल किया जाए।
श्री भट्टी ने विधानसभा में जनगणना और जातिगत जनगणना पर हुई बहस में हिस्सा लेते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्यों से साफ-साफ बताने को कहा कि वे जातिगत जनगणना का समर्थन करते हैं या विरोध। उन्होंने कहा कि तेलंगाना सरकार का सामाजिक-आर्थिक, शैक्षिक, रोजगार और राजनीतिक सर्वेक्षण इसी तरह की देशव्यापी कवायद के लिए एक मॉडल के तौर पर काम करना चाहिए। श्री भट्टी ने बताया कि तेलंगाना सर्वेक्षण में जाति-वार आबादी, व्यवसायों, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति, रोजगार, बेरोजगारी और भूमि स्वामित्व पर व्यापक डेटा इकट्ठा किया गया था।
उन्होंने कहा कि यह कवायद देश के लिए एक मॉडल के तौर पर उभरी है और याद दिलाया कि जब विधानसभा में इसकी रिपोर्ट पेश की गई थी, तो विपक्ष के सदस्यों ने भी इसकी सराहना की थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार तेलंगाना मॉडल के आधार पर देशव्यापी जातिगत जनगणना की मांग करती रही है और आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय जनगणना में जाति की गिनती को शामिल करने के अपने पहले के वादे को पूरा करने में नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि कमजोर वर्गों की वास्तविक स्थिति को समझने और प्रभावी कल्याणकारी व विकास नीतियां बनाने के लिए जातिगत जनगणना जरूरी है।
श्री भट्टी ने जातिगत जनगणना को समाज का 'एक्स-रे' बताते हुए कहा कि समुदायों की आबादी और सामाजिक-आर्थिक स्थितियों के सटीक डेटा से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि सरकारी धन, संसाधन, अवसर और विकास के लाभ आबादी के अनुपात में समान रूप से वितरित हों। उन्होंने कहा कि अगले चुनावों के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनेंगे और दावा किया कि तब तेलंगाना मॉडल के आधार पर पूरे देश में व्यापक सामाजिक-आर्थिक, शैक्षिक, रोजगार और राजनीतिक सर्वेक्षण कराया जाएगा।
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