मुंबई , अगस्त 26 -- ोनी सब का शो 'हस्तिनापुर के वीर' गुरु-शिष्य की कालजयी परंपरा को दर्शाता है। शो में आचार्य द्रोणाचार्य और उनके शिष्यों के बीच का संबंध अनुशासन, समर्पण और धैर्य के जरिए योद्धाओं की यात्रा को आकार देता है। राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर शो के कलाकारों ने अपनी फिटनेस दिनचर्या और खेलों से जुड़ी प्रेरणाओं के बारे में बताया।द्रोणाचार्य की भूमिका निभा रहे जितेन लालवानी ने कहा कि उनके फिटनेस गुरु हमेशा उनके ट्रेनर रहे हैं। उन्होंने उन्हें सिखाया कि फिटनेस सिर्फ बेहतर दिखने का माध्यम नहीं, बल्कि लंबे समय तक कायम रहने वाली ताकत और अनुशासन विकसित करने का जरिया है। उन्होंने कहा कि निरंतरता उनके ट्रेनर की सबसे बड़ी सीख रही है और यही सोच लंबे शूटिंग शेड्यूल के दौरान भी उन्हें प्रेरित करती है। जितेन के मुताबिक, द्रोणाचार्य का किरदार निभाने से उन्हें गुरु-शिष्य संबंध और एक अच्छे शिक्षक की भूमिका को और गहराई से समझने का मौका मिला।
युधिष्ठिर का किरदार निभा रहे अथर खान ने बताया कि सक्रिय रहने और खेलों को महत्व देने के मामले में उनके पिता उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सेट पर वे और उनके सह-कलाकार ब्रेक के दौरान वैनिटी वैन में बैठने या फोन चलाने के बजाय बाहर जाकर क्रिकेट, फुटबॉल और छुपन-छुपाई जैसे खेल खेलना पसंद करते हैं। उनके अनुसार, साथ खेलना टीम को मजबूत बनाता है और खेल लोगों को जोड़ने के साथ-साथ टीमवर्क की भावना भी सिखाते हैं। उन्होंने इस राष्ट्रीय खेल दिवस पर लोगों से अपनी पसंद का कोई खेल चुनकर उसके लिए समय निकालने की अपील की।
दुर्योधन की भूमिका निभा रहे आयुध भानुशाली ने कहा कि दुर्योधन के किरदार के लिए गदा युद्ध का प्रशिक्षण लेने से उन्हें ताकत, आत्मविश्वास और अनुशासन का महत्व समझने में मदद मिली। इस अनुभव ने कुश्ती और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के प्रति उनकी रुचि बढ़ाई। उन्होंने बताया कि उन्होंने बुनियादी कुश्ती प्रशिक्षण भी लिया है। आयुध ने पहलवान सुशील कुमार और साक्षी मलिक को अपना आदर्श बताते हुए कहा कि उनकी मेहनत और उपलब्धियां उन्हें प्रेरित करती हैं। दोस्तों के साथ खेलना भी उन्हें पसंद है, क्योंकि इसमें स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनी रहती है।
अश्वत्थामा की भूमिका निभा रहे धवल त्रिपाठी ने बताया कि हाल ही में उनकी तीरंदाजी में गहरी रुचि विकसित हुई है और इसकी वजह उनका किरदार अश्वत्थामा है। युद्ध और धनुर्विद्या में प्रशिक्षित योद्धा का किरदार निभाने से उनमें इस खेल को समझने की उत्सुकता पैदा हुई। उन्होंने कहा कि तीरंदाजी में शारीरिक क्षमता के साथ मानसिक मजबूती, एकाग्रता, सटीकता और धैर्य भी बेहद जरूरी है।
धवल ने उम्मीद जताई कि वह तीरंदाजी सीखना और उसमें बेहतर होना जारी रखेंगे।
'हस्तिनापुर के वीर' का प्रसारण सोमवार से शनिवार रात 9 बजे सोनी सब पर किया जाता है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित