नयी दिल्ली , मई 29 -- राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि जैन समुदाय ने शिक्षा के माध्यम से केवल शैक्षणिक प्रगति में ही नहीं बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र-निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने "शिक्षा के क्षेत्र में जैन समुदाय का योगदान" विषय पर एक महत्वपूर्ण अध्ययन रिपोर्ट जारी की है।यह अध्ययन सोशियो-इकोनॉमिक एंड एजुकेशनल डेवलपमेंट सोसाइटी (सीड्स) द्वारा तैयार किया गया है। अध्ययन में भारत में जैन समुदाय के ऐतिहासिक विकास, संस्थागत योगदान और मूल्य-आधारित शैक्षिक दर्शन का विस्तृत दस्तावेजीकरण किया गया है।
रिपोर्ट में शिक्षा, अनुसंधान, छात्रवृत्ति, मूल्य-आधारित शिक्षा और शिक्षा तक समावेशी पहुंच को बढ़ावा देने में जैन ट्रस्टों, परोपकारियों, शैक्षिक संस्थानों तथा सामुदायिक संगठनों की भूमिका को प्रमुखता से रेखांकित किया गया है।
अध्ययन के अनुसार जैन समुदाय ने शिक्षा के माध्यम से केवल शैक्षणिक प्रगति में ही नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र-निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ज्ञान, सेवा, करुणा और समावेशिता जैसे मूल्यों से प्रेरित समुदाय की शैक्षिक पहलों ने देश के शैक्षिक और नैतिक परिदृश्य को समृद्ध किया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह अध्ययन अल्पसंख्यक शिक्षा, मूल्य-आधारित अधिगम और समुदाय-नेतृत्व वाले शैक्षिक विकास मॉडलों पर कार्य कर रहे नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं, शैक्षिक संस्थानों और सामुदायिक संगठनों के लिए उपयोगी संदर्भ साबित होगा।
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की सचिव अलका उपाध्याय ने कहा कि यह अध्ययन समावेशी विकास और सूचित नीति-निर्माण की दिशा में आयोग के सतत प्रयासों को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट अल्पसंख्यक समुदायों के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए अनुसंधान-आधारित नीतिगत सुझावों और साक्ष्य-आधारित पहलों के प्रति आयोग की प्रतिबद्धता को भी प्रतिबिंबित करती है।
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