जयपुर , अगस्त 02 -- राजस्थान के जयपुर में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय 'राष्ट्रमंडल शांति, मध्यस्थता और विधि का शासन' सम्मेलन का रविवार को समापन हुआ।
सम्मेलन में 52 राष्ट्रमंडल देशों के न्यायाधीशों, विधि विशेषज्ञों, मध्यस्थों और नीति-निर्माताओं ने न्याय व्यवस्था में मध्यस्थता की भूमिका, कानून के शासन और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर व्यापक मंथन किया।
समापन सत्र की अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश एवं राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायामूर्ति विक्रमनाथ ने की। इस दौरान उन्होंने श्रीलंका के उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए.एच.एम. नवाज के संदर्भ में हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि वह सेवानिवृत्ति के बाद राजनीति में जाने का विचार रखते हैं, तो "श्रीलंका के प्रधानमंत्री सावधान रहें, न्यायमूर्ति नवाज उनकी जगह ले सकते हैं।" न्यायमूर्ति विक्रमनाथ की इस टिप्पणी पर सभागार में मौजूद प्रतिनिधियों के बीच ठहाके गूंज उठे।
सम्मेलन के दौरान न्यायिक लंबित मामलों को कम करने, सुलभ एवं त्वरित न्याय सुनिश्चित करने, अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने और मध्यस्थता को विवाद के समाधान का प्रभावी माध्यम बनाने पर कई तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। विशेषज्ञों ने व्यावसायिक, पारिवारिक, सामुदायिक, पर्यावरणीय और सीमा-पार विवादों के समाधान में मध्यस्थता की उपयोगिता पर अपने विचार रखे।
तीन दिन तक चले इस सम्मेलन का समापन "जयपुर मध्यस्थता घोषणा पत्र -2026" को अपनाने के साथ हुआ। इस घोषणा-पत्र का उद्देश्य राष्ट्रमंडल देशों के बीच मध्यस्थता, विवाद समाधान और कानून के शासन को मजबूत करने के लिए साझा सिद्धांतों एवं सहयोग का ढांचा तैयार करना है। आयोजकों के अनुसार यह घोषणा भविष्य में वैश्विक स्तर पर शांति आधारित न्याय प्रणाली को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित होगी।
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