वॉशिंगटन , मई 13 -- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप स्थानीय समयानुसार आज सुबह बीजिंग पहुंचे और वह यहां अपने चीनी समकक्ष शी जिनपिंग के साथ उच्च स्तरीय शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।

ईरान युद्ध छिड़ने के कारण इस साल की शुरुआत में जो बातचीत टल गयी थी, उसे अब फिर से शुरू किया जा रहा है। श्री ट्रंप मंगलवार को ह्वाइट हाउस से रवाना हुए थे। दोनों नेताओं के बीच बातचीत में व्यापार का मुद्दा सबसे अहम रहने की उम्मीद है। इसके साथ ही, ईरान युद्ध और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति में आ रही बाधाओं पर भी गंभीर चर्चा होने की संभावना है।

श्री ट्रंप ने सोमवार को कहा था कि ऊर्जा सुरक्षा और ताइवान के मुद्दे भी चर्चा में शामिल होंगे। दरअसल, ताइवान का सवाल अमेरिका और चीन के रिश्तों के बीच सबसे संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। अपनी यात्रा से पहले श्री ट्रंप ने सार्वजनिक बयानों में कई बार श्री शी जिनपिंग की तारीफ की। सोमवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, "वे एक महान व्यक्ति हैं। मुझे वे बहुत ही अद्भुत इंसान लगते हैं।"पिछले हफ्ते उन्होंने कहा था, "राष्ट्रपति शी के साथ मेरे रिश्ते बहुत अच्छे हैं। हम चीन के साथ काफी व्यापार करते हैं और बहुत पैसा कमा रहे हैं।" श्री ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर मजाक में यह भी लिखा कि जब दोनों नेता मिलेंगे, तो शी उन्हें 'गले लगायेंगे'। सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, व्यापार, प्रतिबंधों और पश्चिम एशिया के संघर्ष के बावजूद विश्लेषकों का कहना है कि दोनों सरकारें रिश्तों को और बिगड़ने से रोकने तथा उन्हें बेहतर बनाने की कोशिश कर रही हैं।

काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस में चीन मामलों की सीनियर फेलो जोंगयुआन जोइ लियू का कहना है कि फिलहाल दोनों पक्षों की प्राथमिकता आपसी रिश्तों को स्थिर बनाये रखने पर है। सुश्री लियू के अनुसार, "दोनों देशों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि अमेरिका-चीन संबंधों को कैसे स्थिर रखा जाए, ताकि दोनों पक्ष बिना किसी सैन्य टकराव के लंबे समय तक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जारी रख सकें।"उन्होंने कहा, "दोनों पक्षों के लिए इस शिखर सम्मेलन का आयोजित होना ही अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।"इसी तरह, 'सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज' की हेनरीटा लेविन ने कहा कि ईरान युद्ध शुरू होने से पहले ही चीन यह मान चुका था कि वह मजबूत स्थिति में है।

सुश्री लेविन ने बताया, "जब मूल रूप से यह बैठक मार्च में होनी थी, तब भी चीन इस शिखर सम्मेलन को लेकर काफी आश्वस्त महसूस कर रहा था। उन्हें लगता है कि वे 2025 का ट्रेड वॉर जीत चुके हैं।" उन्होंने कहा कि ईरान संघर्ष ने चीन के आत्मविश्वास को और बढ़ा दिया होगा, क्योंकि अमेरिका को मजबूरन अपना सैन्य ध्यान और संसाधन पश्चिम एशिया की बिगड़ती स्थिति की ओर मोड़ने पड़े हैं।

उन्होंने कहा "ईरान युद्ध ने शायद चीन का भरोसा कुछ हद तक बढ़ाया है। वे देख रहे हैं कि अमेरिका का ध्यान एशिया से हट गया है और वह अपने हथियारों का भंडार खत्म कर रहा है, जो एशिया में अपनी ताकत बनाये रखने के लिए बहुत जरूरी थे।"उम्मीद है कि शिखर सम्मेलन में ईरान चर्चा के मुख्य विषयों में से एक बना रहेगा। चीन हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले तेल का दुनिया का सबसे बड़ा खरीदार है। 'यूनाइटेड स्टेट्स-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन' के अनुसार, ईरान के कुल कच्चे तेल के निर्यात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा चीन ही खरीदता है।

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