रायपुर , अगस्त 16 -- छत्तीसगढ़ में स्वतंत्रता दिवस के राज्य स्तरीय मुख्य समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पुलिस विभाग के 12 अधिकारियों और कर्मचारियों को राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया। इनमें एक अधिकारी को विशिष्ट सेवा पदक और 11 अधिकारियों को सराहनीय सेवा पदक प्रदान किया गया। इन पदकों की घोषणा 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर की गई थी।

राजधानी रायपुर में आयोजित समारोह में पुलिस विभाग में उत्कृष्ट और लंबी सेवा के लिए सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) रामावतार सिंह राजपूत को विशिष्ट सेवा पदक प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री साय ने उन्हें पदक पहनाकर उनकी सेवाओं और समर्पण की सराहना की।

सराहनीय सेवा पदक से सम्मानित 11 अधिकारियों में बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग, रायगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह, रायपुर ग्रामीण की पुलिस अधीक्षक श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा, एटीएस की पुलिस अधीक्षक राजश्री मिश्रा, पुलिस मुख्यालय रायपुर की विशा, छठवीं वाहिनी छसबल रायगढ़ की सेनानी निवेदिता पाल, 20वीं वाहिनी छसबल महासमुंद की सेनानी मनीषा ठाकुर रावटे, जिला पुलिस मध्य पुलिस आयुक्तालय रायपुर के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त तारकेश्वर पटेल, पुलिस मुख्यालय रायपुर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उनैजा खातून अंसारी, प्रथम वाहिनी छसबल भिलाई के सहायक सेनानी जयलाल मरकाम और 20वीं वाहिनी छसबल महासमुंद के प्लाटून कमांडर हजारी लाल साहू शामिल हैं।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सम्मानित पुलिसकर्मियों के बीच रामावतार सिंह की लंबी और चुनौतीपूर्ण सेवा विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। उन्होंने अपने सेवाकाल में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में वीआईपी बंदोबस्त, निर्वाचन ड्यूटी और कानून व्यवस्था से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।

श्री सिंह ने बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में वीआईपी मूवमेंट सामान्य शहरों की तरह आसान नहीं होता था। सुरक्षा के लिए पहले से पूरी प्लानिंग करनी पड़ती थी। वीआईपी के रूट से लेकर फोर्स की तैनाती, जवानों के ठहरने की व्यवस्था और पूरे बंदोबस्त की मॉनिटरिंग तक कई स्तरों पर तैयारी होती थी। नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण रूट और सुरक्षा व्यवस्था में अतिरिक्त सावधानी बरती जाती थी।

इसी अवसर पर रायपुर शहर की एकमात्र महिला थाना प्रभारी अर्चना धुरंधर की पुलिस सेवा में उपलब्धियां भी चर्चा में रहीं। महिलाओं और अवयस्क बच्चों से संबंधित शिकायतों के त्वरित निराकरण तथा पारिवारिक विवादों में सुलह कराने के कार्यों के लिए उन्हें राज्यपाल पुरस्कार और रानी सुबरन कुंवर पुरस्कार मिला है।

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