बैतूल , जून 17 -- देश की आजादी के बाद पहली बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के बैतूल आगमन को लेकर जिले में उत्साह का माहौल है। वहीं दूसरी ओर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने कार्यक्रम में सीमित पहुंच और मुलाकात के अवसर नहीं मिलने को लेकर सवाल उठाए हैं।
आदिवासी बहुल बैतूल जिले में राष्ट्रपति के प्रस्तावित दौरे से पहले कई संगठनों ने उनके समक्ष अपनी समस्याएं और मांगें रखने के लिए समय देने का अनुरोध किया था। स्थानीय आदिवासी संगठनों, सामाजिक प्रतिनिधियों और कांग्रेस के जिला नेतृत्व सहित विभिन्न समूहों का कहना है कि उन्होंने प्रशासन के माध्यम से आवेदन और निवेदन प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा था, लेकिन उन्हें इसकी अनुमति नहीं मिली।
संगठनों का आरोप है कि जिले के आदिवासी समुदाय से जुड़े मुद्दों को सीधे राष्ट्रपति तक पहुंचाने का यह एक महत्वपूर्ण अवसर था। उनका कहना है कि बैतूल जैसे आदिवासी बहुल जिले में राष्ट्रपति का दौरा ऐतिहासिक महत्व रखता है, इसलिए स्थानीय समुदाय और जनप्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाना चाहिए था।
कांग्रेस के स्थानीय पदाधिकारियों ने भी इस संबंध में नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों को अपनी समस्याएं और सुझाव रखने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि कम से कम ज्ञापन सौंपने या प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात की व्यवस्था की जाए।
पत्रकार संगठनों में भी कार्यक्रम की कवरेज को लेकर असंतोष दिखाई दे रहा है। कई पत्रकारों का कहना है कि उन्हें कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है। उनका तर्क है कि मीडिया लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है और ऐसे ऐतिहासिक आयोजनों की जानकारी जनता तक पहुंचाने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। पत्रकारों ने कवरेज के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की मांग की है।
हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रपति के दौरे को लेकर सुरक्षा व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता है। सुरक्षा एजेंसियों के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही प्रवेश और कार्यक्रम संबंधी व्यवस्थाएं तय की गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि केवल पूर्व स्वीकृत और निर्धारित श्रेणियों के लोगों को ही कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति दी जा रही है।
राष्ट्रपति के दौरे को लेकर जिले में तैयारियां अंतिम चरण में हैं। सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं और प्रशासन कार्यक्रम को सफल बनाने में जुटा हुआ है। इस बीच प्रतिनिधित्व और पहुंच को लेकर उठे सवाल स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बने हुए हैं।।
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