उदयपुर , जून 18 -- राजस्थान के उदयपुर में बड़ीसादड़ी जैन मित्र मंडल के तत्वावधान में गुरूवार को ऐतिहासिक हल्दीघाटी के योद्धा एवं मेवाड़ के स्वाभिमान के प्रतीक वीर झाला मानसिंह के 450वें बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि सभा एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
मोतीगरी स्थित झाला मान स्मारक पर आयोजित इस कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य नागरिकों, इतिहास प्रेमियों एवं समाजजनों ने वीर योद्धा के अद्वितीय बलिदान को नमन करते हुए उनके जीवन से प्रेरणा लेने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम संयोजक प्रसन्नचंद लसोड़ एवं उम्मेद सिंह कंठालिया ने बताया कि समारोह की अध्यक्षता मोती मगरी स्मारक समिति के सचिव एस.के. शर्मा ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में जैन मित्र मंडल के निदेशक प्रकाश मेहता, मोहन सिंह मेहता एवं जीवन दक उपस्थित रहे।
जैन मित्र मंडल के सचिव कमलेश सामोता ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि वीर झाला मान सिंह का जीवन साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि वर्तमान युवा पीढ़ी को ऐसे महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है और उनके बलिदान की गाथाओं को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना समय की मांग है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में एस.के. शर्मा ने हल्दीघाटी के ऐतिहासिक युद्ध में सादड़ी के वीर झाला मान सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने महाराणा प्रताप की रक्षा के लिए अपने प्राणों काे न्यौछावर कर इतिहास में अमर स्थान प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि झाला मान सिंह केवल एक पराक्रमी योद्धा ही नहीं, बल्कि राष्ट्रधर्म, नेतृत्व और निस्वार्थ समर्पण के सर्वाेच्च आदर्श थे, जिनका बलिदान अब भी देशभक्ति की प्रेरणा देता है।
संगोष्ठी के दौरान श्रीमती प्रभा मेहता ने वीर रस से ओत-प्रोत कविता प्रस्तुत करके वातावरण को राष्ट्रभक्ति और गौरव की भावना से भर दिया। वहीं डॉ. प्रकाश कंठालिया ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए वीरों के इतिहास को संरक्षित रखने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
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