रायसेन , फरवरी 16 -- महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर मध्यप्रदेश के रायसेन जिले के प्राचीन एवं दिव्य स्थल भोजपुर मंदिर परिसर में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी "महादेव" भोजपुर महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।

तीन दिवसीय महोत्सव को मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा जिला प्रशासन - रायसेन के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्घाटन कल महाशिवरात्रि के अवसर पर हुआ। भारतीय संस्कृति एवं परम्परा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने एवं प्रसारित करने संस्कृति विभाग निरन्तर ऐसे आयोजन कर रहा है। महादेव की अलौकिक उपस्थिति और शिवत्व की आध्यात्मिक आभा से आलोकित यह महोत्सव श्रद्धा, संस्कृति और कला का अद्भुत संगम बनकर श्रद्धालुओं एवं कला-रसिकों को भावविभोर कर रहा था। भव्य शिवालय की विराटता के मध्य गूंजते लोकगीत एवं भजन से सजी सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ वातावरण को दिव्यता से अनुप्राणित कर रही थीं।

पहले दिवस की पहली प्रस्तुति बुंदेली लोकगायन की रही। माधुर्य और रस से सराबोर बुन्देलखण्ड अंचल के लोकगीतों में यहां की संस्कृति के सौंदर्य के दर्शन होते हैं। यहाँ के गीतों में शिव के प्रति गहरी आस्था और विश्वास के सुर रचे-बसे हैं। सागर के ऋषि विश्वकर्मा एवं साथी कलाकारों ने अपने गीतों से ऐसा समां बांधा कि श्रोताओं के अंतर्मन तक शिवत्व की धारा प्रवाहित कर दी। उन्होंने शुरुआत शिव शंकर जी बनके दुल्हा मोरी नगरिया आए जू.... एवं गौरा व्याहन भोला की बारात है चली.... से शिव बारात का अलौकिक स्वरूप स्वरों के माध्यम से अभिव्यक्त किया। इसके बाद हम जानत कछु नोने से हुए राजा हिमाचल के दामाद...., दुल्हा बनके महादेव बाबा गांव में आ गए रे...., गौरा सांची बताओ कैसे करवा लाए भोले बाबा से ब्याव.... एवं दुल्हा शिव शंकर की बारात आ गई.... से महाशिवरात्रि पर सम्पूर्ण वातावरण को शिवमय कर दिया। अगले क्रम में गौरा तोरे जैसे सैया पूरे गांव भरे में नैया...., भरदुपरे आ गओ री अरे जो बैरागिया.... एवं लुटिया में लाई भोला भंग.... से प्रस्तुति को विराम दिया।

अगली प्रस्तुति बुन्देलखण्ड के सुप्रसिद्ध बधाई एवं बरेदी लोकनृत्य की रही। उमेश नामदेव एवं साथी, सागर द्वारा नृत्यों की प्रस्तुति दी गई। बधाई नृत्य, जो मांगलिक एवं शुभ अवसरों पर किया जाता है। शिवरात्रि के पावन अवसर पर इस नृत्य के माध्यम से मंच पर दिव्य आनन्द बिखर गया। इसके बाद बरेदी लोकनृत्य में परम्परा, संस्कृति एवं जीवन का उल्लास देखने को मिला।

अंतिम प्रस्तुति सुविख्यात भजन गायक लखबीर सिंह लक्खा एवं साथी, मुम्बई की भक्ति गायन की रही। अपने चिर-परिचित और आस्था से ओतप्रोत अंदाज में लक्खा ने एक से बढ़कर एक भजनों की ऐसी सुरधारा प्रवाहित की कि पूरा परिसर मानो शिवमय हो उठा। हर शब्द में श्रद्धा, हर आलाप में समर्पण और हर ताल में भक्ति का कंपन अनुभव किया गया। श्रोतागण भाव-विभोर होकर कभी ताली, तो कभी हर-हर महादेव के उद्घोष लगाते रहे। मंत्रमुग्ध कर देने वाली स्वर-लहरियों ने वातावरण को शिव-तत्व की दिव्य सुगंध से आलोकित कर दिया। उन्होंने प्रस्तुति की शुरुआत जय शंभू जय जय शंभू.... भजन के साथ की। इसके बाद उन्होंने अपने लोकप्रिय भजनों से श्रद्धालु श्रोताओं को भक्ति के रस से सराबोर कर दिया।

भोजपुर महोत्सव में आज सायं सुश्री शीला त्रिपाठी एवं साथी, भोपाल का लोकगायन, सुश्री भावना शाह एवं साथी, मुम्बई का शिव महिमा नृत्य नाटिका एवं सुविख्यात गायिका महालक्ष्मी अय्यर एवं साथी, मुम्बई द्वारा सुगम संगीत की प्रस्तुति होगी।

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