रायपुर , अगस्त 03 -- छत्तीसगढ़ के रायपुर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद बृजमोहन अग्रवाल और छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया के बीच कथित टेलीफोनिक बातचीत को लेकर उत्पन्न विवाद अब संसदीय और राजनीतिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। सांसद की शिकायत पर लोकसभा सचिवालय ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) से पूरे मामले की तथ्यात्मक जानकारी तलब की है। इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इस मुद्दे पर सांसद का समर्थन करते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा है।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने लोकसभा अध्यक्ष को भेजी अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि 20 मई को स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया के साथ हुई टेलीफोनिक बातचीत के दौरान अधिकारी का व्यवहार अपमानजनक, रूखा और असम्मानजनक था। शिकायत के अनुसार, बातचीत के दौरान स्वास्थ्य सचिव ने कथित तौर पर कहा, "जो करना है कर लो।" सांसद ने इसे संसदीय गरिमा, संवैधानिक मूल्यों और प्रशासनिक आचरण के विपरीत बताते हुए मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
शिकायत में कहा गया है कि सांसद ने अपने लोकसभा क्षेत्र तथा जनहित से जुड़े स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न मामलों के संबंध में स्वास्थ्य सचिव को कई पत्र और रिमाइंडर भेजे थे, लेकिन उन्हें कोई उत्तर नहीं मिला। उनका आरोप है कि कई महीनों से लंबित इन मामलों के कारण क्षेत्रीय विकास और जनहित के कार्य प्रभावित हो रहे थे।
शिकायत के अनुसार, 20 मई की शाम सांसद ने मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा की। इसके बाद प्रमुख सचिव ने स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया को सांसद से संपर्क कर लंबित मामलों के निराकरण के निर्देश दिए। बताया गया कि निर्देश मिलने के बाद स्वास्थ्य सचिव ने सांसद को फोन किया, लेकिन उस समय व्यस्त होने के कारण कॉल रिसीव नहीं हो सकी। बाद में सांसद द्वारा किए गए कॉल बैक के दौरान लंबित मामलों पर चर्चा हुई और इसी बातचीत में कथित विवाद उत्पन्न हुआ।
सांसद ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि बातचीत के दौरान स्वास्थ्य सचिव का रवैया अहंकारपूर्ण और अमर्यादित था। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से मामले को विशेषाधिकार समिति को भेजने का अनुरोध किया है। साथ ही अखिल भारतीय सेवा आचरण नियमों के तहत कार्मिक मंत्रालय से भी स्वास्थ्य सचिव के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए लोकसभा सचिवालय ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग से पूरे प्रकरण पर तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। इसके साथ ही यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही और संसदीय विशेषाधिकार से जुड़े मुद्दे के रूप में भी सामने आया है।
अपनी शिकायत में सांसद ने यह भी कहा है कि यदि एक निर्वाचित लोकसभा सदस्य के साथ ऐसा व्यवहार हो सकता है, तो आम नागरिकों के साथ अधिकारी का रवैया कैसा होगा, इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है। उन्होंने अधिकारी पर जवाबदेही के प्रति उदासीन रहने का आरोप लगाते हुए यह भी उल्लेख किया है कि अमित कटारिया के खिलाफ पूर्व में भी जनप्रतिनिधियों से कथित दुर्व्यवहार की शिकायतें सामने आती रही हैं।
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