रायपुर , सितंबर 08 -- दिल्ली में बीते रविवार को पांच मंजिला इमारत ढहने से सात छात्रों की मौत के बाद छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में खड़े जर्जर भवनों की स्थिति को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। शहर में वर्तमान में 38 अति जर्जर मकान चिह्नित हैं, जिनमें से कई घनी आबादी और व्यावसायिक क्षेत्रों के बीच स्थित हैं।

नगर निगम की ओर से इन भवनों के मालिकों को समय-समय पर नोटिस जारी किए जाते हैं, लेकिन इन्हें हटाने की कार्रवाई सीमित रही है। निगम बारिश से पहले और गणेश विसर्जन झांकी के दौरान खतरनाक भवनों पर नोटिस चस्पा करता है। इसके बाद भवन गिराने की जिम्मेदारी संबंधित मालिकों की बताई जाती है।

इस वर्ष 22 जुलाई को जोन-2 की टीम ने स्टेशन रोड स्थित हनुमान मंदिर के पास एक जर्जर मकान को गिराया था। भवन मालिक को कई बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद मकान नहीं हटाए जाने पर खतरे को देखते हुए निगम ने यह कार्रवाई की थी। इसके अलावा इस वर्ष किसी अन्य अति जर्जर भवन को गिराने की कार्रवाई सामने नहीं आई है।

शहर में सबसे अधिक खतरनाक भवन जोन-4 और जोन-2 क्षेत्र में हैं। सदर बाजार, सत्ती बाजार, ब्राह्मणपारा, पुरानी बस्ती, गुढ़ियारी, महामाया मंदिर वार्ड और कुशालपुर में ऐसे भवन चिह्नित किए गए हैं। इनमें सदर बाजार की स्थिति अधिक संवेदनशील मानी जा रही है। घनी आबादी और प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र होने के कारण यहां दिनभर बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही रहती है। क्षेत्र में कई मकान और पुरानी हवेलियां 100 साल से अधिक पुराने हैं।

जर्जर भवनों को हटाने में संपत्ति विवाद भी बड़ी बाधा बने हुए हैं। कई संपत्तियों के स्वामित्व और बंटवारे से जुड़े मामले अदालतों में लंबित हैं, जिससे उनकी बिक्री, डिस्मेंटलिंग और नए निर्माण की प्रक्रिया रुकी हुई है। ऐसे मामलों में नगर निगम भी अदालती विवाद के कारण प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। खतरनाक भवन नहीं हटाने वाले मालिकों पर फिलहाल जुर्माने की कार्रवाई भी नहीं की जा रही है।

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