रायपुर , अक्टूबर 14 -- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में साइबर अपराधियों ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) का अधिकारी बनकर बुजुर्ग महिला को कथित धनशोधन मामले में गिरफ्तारी का भय दिखाते हुए सात लाख रुपये की ठगी कर ली। आरोपियों ने महिला को पांच दिनों तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर मानसिक दबाव में रखा और सावधि जमा (एफडी) तुड़वाकर रकम अपने बताए बैंक खाते में स्थानांतरित करा ली।
पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार पीड़ित महिला स्टेशन रोड क्षेत्र की निवासी हैं और मशीन मरम्मत का कार्य करती हैं। सात अक्टूबर की दोपहर उनके मोबाइल पर व्हाट्सएप कॉल आया। फोन करने वाले व्यक्ति ने अपना नाम विक्रम सिंह बताते हुए स्वयं को रायपुर में पदस्थ एनआईए अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि महिला के आधार कार्ड का इस्तेमाल कर महाराष्ट्र में एक फर्जी बैंक खाता खोला गया है, जिसमें धनशोधन से संबंधित राशि जमा हुई है। आरोपी ने महिला के नाम गिरफ्तारी वारंट जारी होने की बात कहकर उन्हें भयभीत किया।
महिला को अपने झांसे में लेने के लिए आरोपी ने व्हाट्सएप पर एक कथित फर्जी आधिकारिक पत्र भी भेजा। इसके बाद जांच के नाम पर उनसे परिवार के सदस्यों, संपत्ति, बैंक खातों और एफडी से संबंधित जानकारी हासिल कर ली गई।
आठ अक्टूबर को आरोपियों ने महिला की बातचीत राकेश अग्रवाल नामक व्यक्ति से कराई, जिसे वरिष्ठ अधिकारी बताया गया। उसने भी मामले में गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने की धमकी देकर महिला पर दबाव बनाया। इस दौरान आरोपियों ने लगातार फोन और वीडियो कॉल के माध्यम से महिला को अपने निर्देशों का पालन करने के लिए मजबूर किया। गिरफ्तारी के भय से महिला ने नौ अक्टूबर को केनरा बैंक में अपनी एफडी तुड़वाने की प्रक्रिया शुरू की। बैंक अवकाश के दौरान भी आरोपी उनसे संपर्क बनाए रहे और रकम स्थानांतरित करने के संबंध में निर्देश देते रहे।
इसके बाद 12 अक्टूबर को आरोपियों ने महिला को एचडीएफसी बैंक के माध्यम से राशि भेजने को कहा। वीडियो कॉल पर ही उनसे आरटीजीएस प्रपत्र भरवाया गया और उसमें महाकाली मेटल नामक बैंक खाते का विवरण दर्ज कराकर सात लाख रुपये स्थानांतरित करा लिए गए। रकम भेजने के बाद महिला ने भुगतान की रसीद भी आरोपियों को व्हाट्सएप पर भेज दी।
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