नयी दिल्ली , जुलाई 17 -- देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने कहा है कि रायपुर के जिला उपभोक्ता विवाद समाधान आयोग के उस आदेश को चुनौती देगी जिसमें एक ग्राहक के वाहन के बदले उसे ई20 के अनुकूल वाहन देने का निर्देश दिया गया है।

कंपनी ने गुरुवार को जारी बयान में दावा किया है कि इस मामले में ग्राहक के वाहन से प्राप्त ईंधन में मिलावट के प्रमाण मिले हैं। साथ ही आदेश में कुछ अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों की भी अनदेखी की गयी है।

उसने कहा है कि वह कानून के दायरे सक्षम उच्चतर फोरम के समक्ष इस आदेश को चुनौती देने के लिए जरूरी कदम उठायेगी।

आयोग ने मारुति सुजुकी और उसके अधिकृत डीलर को सेवा में कमी का दोषी ठहराते हुए उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया था। उसने निर्देश दिया है कि कंपनी 45 दिन के भीतर उपभोक्ता को उसी मॉडल की ई20 अनुकूल नयी कार उपलब्ध कराये या वाहन की कीमत (करीब 20.50 लाख रुपये) सहित पंजीयन, बीमा एवं अन्य मदों में खर्च की गयी राशि लौटाये। साथ ही मानसिक प्रताड़ना के लिए एक लाख रुपये का मुआवजा तथा मुकदमे में खर्च हुये 10 हजार रुपये का भुगतान भी करे।

आयोग ने अपने निर्णय में माना कि संबंधित वाहन ई20 ईंधन के अनुरूप नहीं था, फिर भी उपभोक्ता को बेचा गया।

वहीं, कंपनी ने बयान में दावा किया है कि वाहन ई20 के अनुकूल था और ओनर्स मैनुअल में लिखा हुआ है कि ई20 ईंधन के लिए पूरी तरह तैयार था।

ई20 (80 प्रतिशत पेट्रोल और 20 प्रतिशत इथेनॉल) ईंधन के कारण पुराने वाहनों के इंजन को नुकसान की चर्चा इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं, लेकिन किसी अदालत या फोरम द्वारा इस बात को स्वीकार करने का यह पहला मामला है।

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