रायगढ़ , जून 14 -- छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिला जेल में बंद एक विचाराधीन बंदी की उपचार के दौरान मौत को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मृतक के परिजनों ने रविवार को जेल प्रशासन पर बंदी के साथ मारपीट का आरोप लगाते हुए न्यायिक जांच की मांग की। वहीं जेल प्रशासन ने आरोपों को खारिज करते हुए मौत का कारण स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं और शराब की लत को बताया है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, संजय बघेल को अवैध शराब के एक मामले में गिरफ्तार कर 10 जून को रायगढ़ जिला जेल भेजा गया था। जेल में रहने के दौरान 12 जून को उसकी तबीयत बिगड़ गयी, जिसके बाद उसे पहले जेल अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया। हालत में सुधार नहीं होने पर उसे रायगढ़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गयी।
मौत की सूचना मिलने के बाद मृतक के परिजन और ग्रामीण बड़ी संख्या में मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे। मृतक के पिता ने आरोप लगाया कि उनका पुत्र पूरी तरह स्वस्थ था और जेल के भीतर उसके साथ मारपीट की गई थी। उन्होंने दावा किया कि शव पर चोट के निशान दिखाई दे रहे हैं। परिजनों का यह भी आरोप है कि उन्हें सूचना दिए बिना शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
घटना की जानकारी मिलने पर मृतक के गांव के सरपंच सहित अन्य ग्रामीण भी अस्पताल पहुंचे। ग्रामीणों का कहना है कि शव पर चोट के निशान दिखाई देने से मामले को लेकर संदेह उत्पन्न हो रहा है। उन्होंने भी घटना की न्यायिक जांच कर सच्चाई सामने लाने की मांग की है।
उधर, जिला जेल अधीक्षक ने परिजनों के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि संजय बघेल शराब का आदी था। जेल में दाखिल होने के बाद उसकी गतिविधियां असामान्य हो गयी थीं। वह रात के समय इधर-उधर दौड़ रहा था तथा स्वयं से बातें कर रहा था। उसकी स्थिति को देखते हुए उसे चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया और बाद में अस्पताल भेजा गया।
जेल प्रशासन का कहना है कि शराब नहीं मिलने के कारण उत्पन्न विड्रॉल सिंड्रोम से उसकी तबीयत बिगड़ी और उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हुई। प्रशासन ने कहा कि मामले की वास्तविक स्थिति पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल मामले को लेकर परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश है तथा न्यायिक जांच की मांग की जा रही है। घटना ने एक बार फिर जेलों में बंद कैदियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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