प्रयागराज , जून 15 -- अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में चढ़ावे की राशि में कथित गबन के मामले को लेकर साधु-संतों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के संरक्षक स्वामी महेशाश्रम महाराज ने ट्रस्ट को तत्काल भंग करने तथा इसके महासचिव चंपत राय को पद से हटाने की मांग की है। प्रयागराज में सोमवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए स्वामी महेशाश्रम महाराज ने कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में चढ़ावे के सात करोड़ रुपये से अधिक के कथित गबन के मामले में राज्य सरकार द्वारा विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर जांच शुरू की गई है, लेकिन निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए ट्रस्ट के वर्तमान स्वरूप में बदलाव आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि महासचिव चंपत राय को पद से हटाए बिना और ट्रस्ट को भंग किए बिना एसआईटी की जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी नहीं हो सकती। स्वामी महेशाश्रम महाराज ने कहा कि जांच एजेंसियों के लिए यह भी महत्वपूर्ण विषय है कि आखिर महासचिव के पूर्व चालक राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव की चढ़ावे के खजाने तक पहुंच कैसे हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के पास करोड़ों रुपये की संपत्ति होने की भी जानकारी सामने आई है, जिसकी गहन जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके आय के स्रोतों और संपत्तियों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

स्वामी महेशाश्रम महाराज ने कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार द्वारा किया गया था और उसके पदाधिकारियों की नियुक्ति भी उसी प्रक्रिया के तहत हुई थी। उन्होंने दावा किया कि ट्रस्ट के गठन के समय संत समाज का एक वर्ग चंपत राय के नाम को लेकर सहमत नहीं था, लेकिन सरकार के निर्णय का सम्मान करते हुए किसी प्रकार का सार्वजनिक विरोध नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि अब जब ट्रस्ट से जुड़े इस कथित वित्तीय अनियमितता के मामले ने तूल पकड़ लिया है, तो चंपत राय को तत्काल पद से हटाना आवश्यक हो गया है, ताकि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच संभव हो सके। स्वामी महेशाश्रम महाराज ने केंद्र सरकार से नए ट्रस्ट के गठन की भी मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि नए ट्रस्ट में अयोध्या के प्रमुख साधु-संतों को प्रतिनिधित्व दिया जाए तथा विश्व हिंदू परिषद के स्वच्छ छवि वाले पदाधिकारियों को भी शामिल किया जाए। समाचार लिखे जाने तक स्वामी महेशाश्रम महाराज द्वारा लगाए गए आरोपों और ट्रस्ट को भंग करने की मांग पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अथवा संबंधित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

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