महासमुंद , जुलाई 16 -- छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ कांग्रेस नेता राजेन्द्र तिवारी और प्रमोद दुबे ने अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावा चाेरी की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे तथा मंदिर के चढ़ावे में गडबड़ी सामने आयी हैं। उन्होंने कहा कि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ विषय है, इसलिए पूरे मामले की पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिये।
श्री तिवारी ने कहा कि इस विषय से जुड़े सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना आवश्यक है ताकि किसी प्रकार की आशंका या विवाद की स्थिति न रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि चढ़ावे के उपयोग को लेकर विभिन्न स्तरों पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने पूरे मामले का फॉरेंसिक ऑडिट कराने, ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक करने तथा कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
रायपुर नगर निगम के पूर्व महापौर और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद दुबे ने स्वयं को सनातनी ब्राह्मण बताते हुए कहा कि भगवान राम उनके लिए काल्पनिक नहीं, बल्कि आस्था के केंद्र हैं।
श्री दुबे ने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण के लिए प्राप्त चंदे, चढ़ावे और भूमि खरीद से जुड़े मामलों में पारदर्शिता को लेकर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले का फोरेंसिक ऑडिट कराया जाए और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
कांग्रेस नेता ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग कर एक नया पारदर्शी ट्रस्ट गठित किया जाए, जो चंदे, चढ़ावे और अन्य वित्तीय लेन-देन का जवाबदेह तरीके से संचालन करे।
श्री दुबे ने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों के इस्तीफे और विभिन्न आयोजनों पर हुए भारी खर्च से कई सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि मामले में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई करने के बजाय सभी जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
उन्होंने दोहराया कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है और इससे जुड़े प्रत्येक वित्तीय पहलू की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भी इस मुद्दे पर अपना पक्ष स्पष्ट करने और पूरे मामले में जवाब देने की मांग की। साथ ही श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, सदस्य अनिल मिश्रा तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाये।
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