रायपुर , अप्रैल 02 -- छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में गुरुवार को मुख्य आरोपी अमित जोगी को तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने के छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के निर्देश के तुरंत बाद इस मामले में राजनीतिक दलों के नेताओं ने प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं।

जहां भाजपा ने इसे "न्याय की जीत" बताया, वहीं कांग्रेस ने इसे न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए टिप्पणी से परहेज किया है। इस अहम फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।

इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए अमित जोगी ने कहा" आज उच्च न्यायालय ने मेरे विरुद्ध सीबीआई की अपील को मात्र 40 मिनट में स्वीकार कर लिया, । मुझे खेद है कि जिस व्यक्ति को पहले दोषमुक्त किया गया था, उसे बिना पक्ष रखे दोषी करार दे दिया गया। मुझे उच्चतम न्यायालय पर पूरा भरोसा है और मैं इस फैसले को चुनौती दूंगा।"भाजपा के वरिष्ठ नेता नरेश गुप्ता ने कहा कि उच्च न्यायालय का यह निर्णय स्वागत योग्य है और समाज में ऐसे कृत्य करने वाले जो लोग हैं उनको सजा मिलनी ही चाहिए और अवश्य रूप से मिलनी चाहिए। समाज में व्यवस्थाओं को बनाए रखने के लिए ऐसे भ्रष्टाचारियों और अपराधियाें को हमेशा सजा देनी चाहिए।

भाजपा प्रवक्ता राजीव चक्रवर्ती ने कहा, " पूर्व में जब उनके पिता अजीत जोगी जीवित थे तब उन्होंने अपने प्रभाव से अमित को बचा लिया था लेकिन आज असल में न्याय की जीत हुई है । आज जो फ़ैसला दिया है वो छत्तीसगढ़ की राजनीति के लिए एक सबक है। यहां किसी की राजनीतिक हत्या करके कोई भी राजनीति नहीं कर सकता । ये अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय है जिसका हम स्वागत करते हैं ।"इस मामले में कांग्रेस के मीडिया प्रभारी सुशील आनंद शुक्ला ने कहा," पीड़ित पक्ष सतीश जग्गी जिनके पिता की हत्या हुई थी वो इस मामले को लेकर उच्चतम न्यायालय गए थे वहां से मामले की फिर से उच्च न्यायालय में सुनवाई का आदेश दिया गया। अब इसमें जो भी तथ्य है उसे अमित जोगी को अदालत के सामने प्रस्तुत करना चाहिए। ये मामला भले ही उस समय राजनीतिक था पर अब पूरी तरीके से ये मामला अदालती मामला है क्योंकि यह न्यायालय में है तो इस पर किसी तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं होगा । हम ये मानते हैं कि जग्गी परिवार को न्याय मिलना चाहिए ।"कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा, " जग्गी हत्या कांड मामले में पीड़ित पक्ष ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की थी और उसी के निर्देश पर हाई कोर्ट ने अमित जोगी को तीन सप्ताह में आत्मसमर्पण करने को कहा है। मामला न्यायलय के विचाराधीन है और जिस प्रकार जग्गी हत्याकांड में सजा मिल रही है उसी तरह झिरम कांड के दोषियों को भी कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए और हमें उम्मीद है कि उस मामले में न्यायालय दोषियों को नहीं बख्शेगा । "गौरतलब है कि 4 जून 2003 को एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जिससे पूरे प्रदेश में सनसनी फैल गई थी। इस मामले में कुल 31 आरोपियों को नामजद किया गया था, जिनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे।

रायपुर की विशेष अदालत ने 31 मई 2007 को 28 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिनमें अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, (मृत) विक्रम शर्मा, जबवंत और विश्वनाथ राजभर शामिल हैं, जबकि अमित जोगी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया था।

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