रामपुर , अप्रैल 24 -- उत्तर प्रदेश के रामपुर में किसान नेता संजोर अली पाशा, उनके बेटे सहित 35 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन पर निगम की लकड़ी के अवैध कटान में जब्त ट्रैक्टर-ट्रॉली छुड़ाने के लिए धरना-प्रदर्शन कर दबाव बनाने, वन विभाग कार्यालय का मुख्य गेट बंद कर सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करने तथा कानून-व्यवस्था प्रभावित करने का आरोप है।

वन विभाग के सूत्रों के अनुसार उप प्रभागीय वनाधिकारी ओमप्रकाश राम ने पुलिस को लिखित तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया है। तहरीर में कहा गया है कि 23 अप्रैल को वह तथा अन्य अधिकारी और कर्मचारी नुमाइश ग्राउंड, पनवड़िया स्थित प्रभागीय निदेशक, सामाजिक वानिकी प्रभाग, रामपुर कार्यालय में राजकीय कार्य कर रहे थे। इस दौरान दोपहर लगभग 12:15 बजे भारतीय किसान मजदूर संगठन, रामपुर के जिलाध्यक्ष संजोर अली पाशा , सुहेल पाशा , हनीफ, असब अली पाशा, जगदीश, राशिद, जाहिद तथा लगभग 30-35 अन्य लोगों के साथ वहां पहुंचे और धरना-प्रदर्शन करते हुए लाउडस्पीकर से नारेबाजी शुरू कर दी।

आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय का मुख्य गेट बंद कर दिया और प्रभागीय निदेशक को कक्ष से बाहर आकर वार्ता करने के लिए दबाव बनाया। अधिकारियों द्वारा उन्हें कार्यालय कक्ष में आकर अपनी मांग रखने के लिए आमंत्रित किया गया, लेकिन वे अपने रुख पर अड़े रहे और लगभग दो घंटे तक नारेबाजी तथा अभद्र व्यवहार करते रहे। इससे कार्यालय में कार्यरत अधिकारियों, कर्मचारियों तथा आमजन को आवाजाही में बाधा हुई और राजकीय कार्य प्रभावित हुआ।

वन विभाग के अनुसार संजोर अली पाशा ग्राम नसरतनगर, शाहबाद-रामपुर-बाजपुर मार्ग पर लॉट संख्या 47/2025-26 से संबंधित वृक्षों के अतिरिक्त तीन पेड़ों के अवैध कटान में पकड़ी गई ट्रैक्टर-ट्रॉली से भी जुड़े हैं। इस मामले में क्षेत्रीय वन अधिकारी रामपुर द्वारा भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 33 और 52 के तहत वन अपराध रेंज केस संख्या 1/रामपुर/2026-27 दिनांक 12 अप्रैल 2026 को दर्ज किया गया था। आरोप है कि उसी जब्त ट्रैक्टर-ट्रॉली को छुड़ाने के लिए दबाव बनाया जा रहा था।

पुलिस बल के मौके पर पहुंचने के बाद स्थिति नियंत्रित की गई और प्रभागीय निदेशक से वार्ता के बाद प्रदर्शनकारी ज्ञापन देकर वहां से चले गए। इस मामले में संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

उधर किसान नेता संजोर अली पाशा ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि विभाग किसानों को दबाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों का अपनी समस्याओं को लेकर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करना उनका अधिकार है और इस दौरान किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई को लेकर किसानों में भारी नाराजगी है।

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