रामपुर , मई 04 -- उत्तर प्रदेश का रामपुर जिला अब पारंपरिक कृषि के साथ-साथ मत्स्य पालन और मछली बीज उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से उभरकर उत्तर भारत का अग्रणी केंद्र बन गया है। जिले की 56 हैचरियों से करीब 200 करोड़ रुपये के मछली बीज की आपूर्ति देश के विभिन्न हिस्सों में की जा रही है, जिसके चलते रामपुर को 'मिनी कोलकाता' की पहचान मिली है।

अधिकृत सूत्रों ने सोमवार को बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले में मछली उत्पादन में उल्लेखनीय 27 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। कुल उत्पादन 10,402 मीट्रिक टन से अधिक पहुंच गया है। उत्पादन में इस तेजी का सीधा असर रोजगार पर भी पड़ा है और मत्स्य पालन व बीज उत्पादन से 3,846 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है।

मत्स्य विभाग के सहायक निदेशक प्रशांत गंगवार ने बताया कि मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत दी जा रही सब्सिडी और आधुनिक तकनीकों के उपयोग ने इस क्षेत्र को नई गति दी है। रामपुर की पंगेसियस मछली और उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की मांग दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों में तेजी से बढ़ी है।

उन्होने बताया कि तहसील मिलक के ग्राम धनौरा निवासी सत्येन्द्र कुमार की 'फौजी फिश हैचरी' इस क्षेत्र में सफलता का प्रमुख उदाहरण बनकर उभरी है। वर्ष 2002 से संचालित इस हैचरी में रोहू, कतला, ग्रास, सिल्वर और नैन मछलियों के बीज तैयार किए जाते हैं। लगभग 70 से 80 लाख रुपये के वार्षिक टर्नओवर वाली यह हैचरी 100 से 150 लोगों को रोजगार दे रही है। सरकारी योजना के तहत एरेटर मशीन पर मिली 30 हजार रुपये की सब्सिडी से उत्पादन क्षमता में और वृद्धि हुई है।

अधिकारी ने सुझाव दिया कि यदि बिजली आपूर्ति को 10 घंटे से बढ़ाकर 18-20 घंटे किया जाए और सोलर पैनल की सुविधा उपलब्ध हो, तो लागत में कमी आएगी और लाभ बढ़ेगा।

इसी तरह सहकारी समितियां भी मत्स्य पालन को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रही हैं। शाहाबाद तहसील के ग्राम कीरा निवासी राजेंद्र प्रसाद द्वारा संचालित मत्स्य जीवी सहकारी समिति 264 हेक्टेयर सामुदायिक तालाब और निजी तालाबों में मत्स्य पालन कर रही है। समिति का वार्षिक टर्नओवर 10 से 15 लाख रुपये के बीच है और यह स्थानीय बाजारों से लेकर अन्य राज्यों तक ताजी मछली की आपूर्ति कर रही है।

राजेंद्र प्रसाद ने सुझाव दिया कि तालाब पट्टा आवंटन के बाद अधिकार पत्र शीघ्र जारी किया जाए, ताकि समय पर बीज डालकर उत्पादन बढ़ाया जा सके। साथ ही मत्स्य पालन को कृषि का दर्जा देकर सस्ती बिजली और बोरिंग सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी की।

सहायक निदेशक ने बताया कि मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत तालाब पट्टाधारकों को बीज और चारे के लिए प्रति हेक्टेयर 1.60 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है। जिले में अब तक 419 हेक्टेयर तालाब पट्टे पर आवंटित किए जा चुके हैं, जिनमें पारदर्शिता और सामाजिक संतुलन का विशेष ध्यान रखा गया है।

आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से भी उत्पादन को नई दिशा मिल रही है। 'बायोफ्लॉक' और 'रीसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस)' जैसी तकनीकों के माध्यम से कम पानी और सीमित स्थान में अधिक उत्पादन संभव हो रहा है। जिले में वर्तमान में चार बायोफ्लॉक और एक आरएएस यूनिट सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा दिया जाए, तो रामपुर का मत्स्य उद्योग न केवल प्रदेश बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों को छू सकता है।

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