रामनगर , मार्च 06 -- उत्तराखंड के रामनगर में होली के दो दिन बाद भी मैदानी इलाकों से बड़े-बड़े डीजे वाहनों का गिरिजा मंदिर की ओर आने का सिलसिला लगातार जारी है, तेज आवाज में बज रहे इन डीजे से ध्वनि प्रदूषण बढ़ रहा है, जिससे आसपास के जंगलों में रहने वाले पक्षियों और वन्यजीवों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन ने ऐसे वाहनों को चिन्हित कर कार्रवाई करने की बात कही है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक शोर से जानवरों के व्यवहार और उनके प्राकृतिक वातावरण पर असर पड़ सकता है। मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन भी अब सतर्क नजर आ रहा है।अधिकारियों का कहना है कि नियमों का उल्लंघन कर तेज आवाज में डीजे बजाने वाले वाहनों को चिन्हित किया जा रहा है और उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
रामनगर में होली का त्योहार समाप्त होने के बाद भी बाहरी क्षेत्रों से डीजे वाहनों के आने का सिलसिला थम नहीं रहा है। खासतौर पर मैदानी इलाकों जैसे रामपुर, स्वाहारा और आसपास के अन्य क्षेत्रों से बड़ी संख्या में युवा बड़े-बड़े डीजे वाहनों के साथ गिरिजा मंदिर की ओर पहुंच रहे हैं। इन वाहनों में लगे भारी साउंड सिस्टम और तेज आवाज में बजते डीजे के कारण पूरे क्षेत्र में ध्वनि प्रदूषण बढ़ता नजर आ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार बज रहे तेज डीजे से आम लोगों को परेशानी हो रही है, वहीं पर्यावरण और वन्यजीवों के लिए भी यह स्थिति चिंता का विषय बन रही है। गिरिजा मंदिर और उसके आसपास का इलाका कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के बेहद करीब है। यहां घने जंगल और समृद्ध जैव विविधता पाई जाती है, ऐसे में तेज आवाज और भारी साउंड सिस्टम से निकलने वाला शोर जंगलों में रहने वाले वन्यजीवों और पक्षियों को प्रभावित कर सकता है।
उल्लेखनीय है कि बीते दिन भी उपजिलाधिकारी गोपाल चौहान द्वारा कई डीजे वाहनों को रोककर उनके साउंड सिस्टम बंद करवाए गए थे, प्रशासन ने साफ किया है कि ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों का पालन करना सभी के लिए अनिवार्य है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के दौरान पर्यावरण और वन्यजीवों का भी ध्यान रखें, ताकि क्षेत्र की शांति और प्राकृतिक संतुलन बना रहे।
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