रामनगर , मार्च 13 -- उत्तराखंड के रामनगर पीएनजी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में दो दिवसीय बौद्धिक संपदा अधिकार विषय पर यूकोस्ट द्वारा प्रायोजित कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला का शुभारम्भ मुख्य अतिथि पूर्व निदेशक उच्च शिक्षा उत्तराखंड प्रो. सी.डी. सूंठा, मुख्यवक्ता प्रो. नन्दा गोपाल साहू, प्राचार्य प्रो. एम. सी. पाण्डे एवं चीफ प्रॉक्टर प्रो.एस.एस.मौर्या द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।
कार्यशाला संयोजक एवं बौद्धिक संपदा अधिकार प्रकोष्ठ के संयोजक डॉ.पवन टम्टा ने कार्यशाला की प्रस्तावना प्रस्तुत कर अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। मुख्यवक्ता प्रो. साहू द्वारा आईपीआर कार्यशाला के उद्देश्य एवं प्रासंगिकता पर जोर दिया गया और सभी छात्र छात्राओं को राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा जागरूकता योजना तथा भारत सरकार द्वारा संचालित बौद्धिक संपदा के लिए कार्यक्रमों के बारे में जागरूक किया गया। उन्होंने प्रश्नोत्तर सत्र में प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों के जिज्ञासाओं का सटीक जवाब देकर बौद्धिक संपदा अधिकार की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से बताया जैसे कि नवीन शोध,पहचान,आवेदन,जांच,प्रकाशन,पंजीकरण।
मुख्य अतिथि पूर्व निदेशक उच्च शिक्षा प्रो० सूंठा द्वारा आईपीआर को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में व्यावहारिक और आवश्यक बताया गया। उन्होंने आगे कहा कि हमें नवाचार का प्रयोग और रचनात्मकता की रक्षा करनी होगी। इससे उच्च शिक्षा से जुड़े जनों एवं समाज को अपने दृष्टिकोण और लक्ष्य प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
प्रश्नोत्तर वार्ता में गणित विभाग प्रभारी डॉ.प्रमोद जोशी, डा. मूलचन्द्र शुक्ल सहित छात्र छात्राओं द्वारा वर्तमान संदर्भ में आईपीआर की प्रासंगिकता एवं प्रोसेस आफ आईपीआर के सन्दर्भ में चर्चा की गयी। कार्यक्रम के अध्यक्ष प्राचार्य प्रो. एम.सी. पाण्डे ने कार्यशाला हेतु शुभकामनाएं प्रदान कर वर्तमान में इसकी उपयोगिता पर बात रखी।
मंच संचालन डॉ. प्रकाश विष्ट द्वारा एवं धन्यवाद ज्ञापन चीफ प्रॉक्टर प्रो.एस.एस.मौर्या द्वारा किया गया। कार्यशाला में प्रो.जे.एस.नेगी,प्रो.अनुमिता अग्रवाल, डॉ. पुनीता कुशवा हा,डॉ.लवकुश कुमार, डॉ.सुमन कुमार,डॉ.शरद भट्ट,डॉ.सिराज अहमद आदि प्राध्यापक एवं समस्त संकायों के स्नातकोत्तर और शोधार्थी छात्र छात्राएँ उपस्थित रहे।कार्यशाला के आयोजन में आयोजक सचिव डॉ.पवन टम्टा,सह आयोजक सचिव डॉ.योगेश चन्द्र एवं डा. सुभाष चन्द्र पोखरियाल,डॉ.दीपक खाती,गोविन्द जगपांगी व बलवन्त सिंह का विशेष सहयोग रहा।
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