जयपुर , अक्टूबर 24 -- राजस्थान में गत सितंबर में राज निवेश पर 11 हजार 739.27 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव दर्ज हुए हैं।
राज्य के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने बताया कि अप्रैल से सितंबर के बीच 31 हजार 892 आवेदनों को स्वीकृति दी गई। यह पिछले पूरे वित्त वर्ष में दी गई 29 हजार 536 स्वीकृतियों से अधिक है। श्री श्रीनिवास ने 'डिरेगुलेशन एंड कम्प्लायंस रिडक्शन फेज-वन' की सितंबर की मासिक प्रभाव आकलन रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्षों की जानकारी दी।
उन्हांने बताया कि रक्षा क्षेत्र में 4840 करोड़ रुपये, पर्यटन एवं आतिथ्य क्षेत्र में 3058 करोड़ रुपये, सौर उपकरण निर्माण में एक हजार करोड़ रुपये और अचल संपत्ति क्षेत्र में 744 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव दर्ज हुए। कुल प्रस्तावित निवेश राशि में इन चार क्षेत्रों की हिस्सेदारी लगभग 82 प्रतिशत रही।
उन्होंने बताया कि प्रथम चरण के सभी 23 प्राथमिकता क्षेत्रों में सुधार पूरे किए गए हैं। इनका उद्देश्य उद्यमियों के लिए प्रक्रियाएं सरल बनाना, अनुपालन का भार कम करना और सेवाएं समय पर उपलब्ध कराना है। भूमि रूपांतरण की समयसीमा 90 से घटाकर 45 दिन की गई है। जयपुर विद्युत वितरण निगम में स्थायी बिजली कनेक्शन के आवेदनों का निस्तारण समय 10 से घटकर चार दिन और विधिक मापविज्ञान से जुड़े आवेदनों का समय 12 से घटकर 6 दिन रह गया है।
राज निवेश की एकल खिड़की व्यवस्था पर 190 सेवाएं उपलब्ध हैं। गत अप्रैल से सितंबर के दौरान 60 हजार 229 आवेदन प्राप्त हुए। पिछले पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में 34 हजार 704 आवेदन मिले थे। सर्वाधिक उपयोग वाली 10 सेवाओं के लिए 51 हजार 548 आवेदन प्राप्त हुए, जो कुल आवेदनों के करीब 86 प्रतिशत हैं। आवेदनों की निस्तारण दर अगस्त के 47 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 52 प्रतिशत हो गई।
जिलावार प्रगति की जानकारी देते हुए मुख्य सचिव ने बताया कि जयपुर 5,501 स्वीकृतियों के साथ अग्रणी रहा। इसके बाद जोधपुर में 2,577, अजमेर में 1,808, कोटा में 1,452 और हनुमानगढ़ में 1,238 स्वीकृतियां दी गईं। डीडवाना-कुचामन, सीकर, भीलवाड़ा, अलवर और उदयपुर भी अग्रणी जिलों में शामिल रहे। रिपोर्ट में जिलावार आंकड़ों के आधार पर बाधाओं की पहचान कर सेवाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है।
पर्यावरण से जुड़े नियमों में सुधार के तहत श्वेत श्रेणी में शामिल गतिविधियों की संख्या 104 से बढ़ाकर 877 की गई है। रिपोर्ट में समयबद्ध मंजूरी, स्वप्रमाणन, जोखिम के आधार पर निरीक्षण, श्रम संबंधी लचीले प्रावधानों और पारदर्शी निगरानी व्यवस्था जैसी पहलों का भी उल्लेख है।
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