मुंबई , मई 12 -- महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने नागरिकों से व्यक्तिगत खर्च कम करने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कथित अपील को लेकर उन पर निशाना साधा और सवाल किया कि जब राजनीतिक नेता महंगे सार्वजनिक कार्यक्रमों, काफिलों तथा विदेशी दौरों को जारी रखे हुये हैं, तो आम लोगों को अपने खर्चों में कटौती करने की सलाह क्यों दी जा रही है।
श्री राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि जहां नागरिकों से ईंधन, यात्रा और सोने की खरीद जैसे खर्चों में कटौती करने का आग्रह किया जा रहा है, वहीं राजनीतिक रोड-शो, जनकल्याणकारी योजनाओं और चुनाव से जुड़ी गतिविधियों पर भारी सार्वजनिक धन खर्च किया जा रहा है। उन्होंने मुद्रास्फीति, मुद्रा के मूल्य में गिरावट और कथित आर्थिक अनिश्चितता पर भी चिंता जतायी और देश की वित्तीय स्थिति पर विस्तार से चर्चा करने के लिये संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की।
मनसे प्रमुख ने सरकार पर आर्थिक अनुशासन को लेकर "दोहरे मानदंड" अपनाने का आरोप लगाया और पिछले नेतृत्व के उदाहरण देते हुये तर्क दिया कि जनता को मितव्ययिता की सलाह देने से पहले राजनीतिक नेताओं को अपने खर्च कम करने चाहिए। उन्होंने कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का भी जिक्र किया और कहा कि पिछली सरकारों के दौरान भी कच्चा तेल 90 से 100 अमेरिकी डॉलर के स्तर तक पहुंच गया था, लेकिन उनके अनुसार, तब वित्तीय बोझ जनता पर इस तरह नहीं डाला गया था।
सरकार पर "दोहरे मानदंड" का आरोप लगाते हुए उन्होंने दावा किया कि जहां एक ओर "रेवड़ी संस्कृति" या लोकलुभावन कल्याणकारी राजनीति की सार्वजनिक रूप से आलोचना की जाती है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक लाभ के लिये कल्याणकारी और चुनावी योजनाओं पर बड़े पैमाने पर खर्च किया जा रहा है। मनसे नेता ने अपनी टिप्पणियों के दौरान देश की आर्थिक स्थिति के संबंध में भी चिंताएं व्यक्त कीं।
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