जयपुर , अक्टूबर 30 -- राजस्थान सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी एवं पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल एवं उनके परिजनों के नाम रिसॉर्ट में संपत्तियां खरीदने के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) जांच को मंजूरी दी है।
एसीबी के पुलिस महानिदेशक गोविन्द गुप्ता ने शुक्रवार रात बताया कि राजस्थान कैडर के आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल द्वारा निजी कंपनी गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों से कथित आपराधिक मिलीभगत कर अपने पद एवं प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए स्वयं एवं संबंधित कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने तथा राज्य सरकार को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाने के तथ्य प्रथम दृष्टया सामने आए हैं। इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 2018 की धारा 17-ए के तहत विस्तृत जांच एवं अनुसंधान के लिए मंजूरी प्रदान की गयी है।
श्री गुप्ता ने बताया कि गत 27 अक्टूबर को एक अखबार में प्रकाशित खबर तथा उद्योग विभाग से प्राप्त तथ्यात्मक रिपोर्ट का ब्यूरो द्वारा समग्र परीक्षण एवं विश्लेषण किया गया। इसके अतिरिक्त गोपनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के आधार पर प्रारंभिक स्तर पर सामने आए तथ्यों के संबंध में प्राथमिक जांच दर्ज कर विस्तृत जांच किया जाना उचित पाया गया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि श्री अग्रवाल ने राजस्थान में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर पदस्थापन के दौरान जिला कलेक्टर, उदयपुर, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अध्यक्ष तथा अतिरिक्त मुख्य सचिव, उद्योग एवं अन्य विभागों के पदों पर रहते हुए कथित रूप से अपने पद एवं प्रभाव का दुरुपयोग किया। आरोप है कि उन्होंने निजी कंपनी गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड, जिसके द्वारा 'अनंता' नाम से होटल एवं रिसॉर्ट संचालित किये जाते हैं, के निदेशकों से मिलीभगत कर कंपनी को रिसॉर्ट निर्माण संबंधी शर्तों में अनुचित छूट, आवश्यक प्रमाण-पत्रों की जांच के बिना स्वीकृतियां तथा विशेष रियायती आर्थिक पैकेज दिलयाकर अनुचित लाभ पहुंचाया।
जानकारी के अनुसार उदयपुर स्थित बुझड़ा रिसॉर्ट में श्री अग्रवाल एवं उनकी पत्नी के नाम पर 10-10 विला 15-15 लाख रुपए में खरीदे हैं, जबकि अलवर के अजबगढ़ के अनंता रिसॉर्ट में श्री अग्रवाल एवं उनकी पत्नी के नाम पर 8 विला 16.5-16.5 लाख रुपए में एवं दोनों पुत्रों के नाम पर 4 विला लगभग 15-15 लाख तथा सास-ससुर के नाम पर 4 विला लगभग 16.5-16.5 लाख रुपए में खरीदे जाने की जानकारी सामने आयी है। इन संपत्तियों का क्रय कथित तौर पर बाजार मूल्य की तुलना में काफी कम कीमत पर किया गया।
इसी प्रकार गोपनीय सूत्रों से सामने आया है कि वित्त विभाग द्वारा प्राईवेट कंपनी गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड को विशेष रियायती आर्थिक पैकेज जिस गत 27 मार्च को जारी किया गया, उसी दिनांक को श्री शिखर अग्रवाल द्वारा 20 विला की रजिस्ट्री करायी गयी है।
प्रथम दृष्टया यह भी प्रतीत हुआ कि श्री अग्रवाल द्वारा अपने पदस्थापन के दौरान निजी कंपनी के निदेशकों के साथ कथित आपराधिक मिलीभगत कर कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया गया तथा राज्य सरकार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। इसके अतिरिक्त स्वयं एवं परिजनों के नाम पर कथित रूप से आय से अधिक परिसंपत्तियां अर्जित किए जाने के तथ्यों की भी विस्तृत जांच किया जाना आवश्यक पाया गया।
इन तथ्यों के आधार पर राजस्थान सरकार द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 2018 की धारा 17-ए के तहत विस्तृत जांच / अनुसंधान के लिए पूर्वानुमोदन प्रदान किया गया है। प्रकरण में श्री अग्रवाल, आईएएस (तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव, उद्योग विभाग, राजस्थान), निजी कंपनी गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की विस्तृत जांच की जायेगी।
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