अगरतला , जुलाई 16 -- त्रिपुरा प्रदेश कांग्रेस समिति ने मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा को पत्र लिखकर कहा है कि राज्य में शिक्षकों के लगभग 18,000 पद खाली पड़े हैं और इस वजह से राज्य की शिक्षा प्रणाली एक बड़े संकट का सामना कर रही है ।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आशीष कुमार साहा ने अपने पत्र में लिखा कि 400 से अधिक स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। कई स्कूलों में प्रशासनिक कर्मचारियों की कमी है, जिसके कारण शिक्षकों को अतिरिक्त भूमिकाएं निभाने के लिए मजबूर होना पड़ता है और इससे उनका शैक्षणिक प्रदर्शन प्रभावित होता है। उन्होंने शिक्षकों की कमी, रुकी हुई भर्ती प्रक्रिया, स्कूलों का बंद होना और शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक तथा लिपिकीय कार्यों में लगाए जाने जैसे मुद्दों का हवाला देते हुए स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियों का स्तर पर गहरी चिंता जताई और इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।इसकी वजह से पढ़ाई लिखाई का माहौल खराब हो रहा है।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों पर प्रशासनिक और लिपिकीय कार्यों का भारी बोझ है, जिससे उनके पास पढ़ाई करवाने के लिए बहुत कम समय बचता है और कक्षाओं में छात्रों की उपस्थिति के प्रति रुचि कम हो रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल प्रशासन प्रदर्शन के आंकड़ों को बेहतर दिखाने के लिए उपस्थिति रिकॉर्ड में हेरफेर करता है, जिससे छात्र वास्तविक उपस्थिति के बिना भी परीक्षाओं में बैठने के पात्र हो जाते हैं।
कांग्रेस नेता ने चुनिंदा सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी शिक्षकों की कमी, ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में शैक्षणिक संस्थानों के बंद होने और छात्रों को पाठ्यपुस्तकों के देर से वितरण (अक्सर परीक्षाओं से केवल एक महीने पहले) जैसे मुद्दों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने इस वर्ष लगभग 450 स्कूलों में पूर्व-प्राथमिक और शिशु कक्षाएं शुरू करने के प्रस्तावित निर्णय पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे वर्तमान शिक्षकों पर बोझ और बढ़ जाएगा। कांग्रेस ने जनगणना से जुड़े कार्यों में लगभग 9,000 शिक्षकों और शिक्षा कर्मियों को तैनात करने की सरकार की योजना पर पुनर्विचार करने की मांग की। उन्होंने सरकार पर शिक्षकों की प्राथमिक जिम्मेदारियों से समझौता करने और उन्हें अत्यधिक तनाव में डालने का आरोप लगाया।
एक समाधान के रूप में, श्री साहा ने जनगणना गतिविधियों के लिए शिक्षित बेरोजगारों को अनुबंध के आधार पर अस्थायी रूप से काम पर रखने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इससे रोजगार के अवसर पैदा होंगे और शिक्षकों को राहत मिलेगी। इसके साथ ही उन्होंने मतदान केंद्र स्तरीय अधिकारी की भूमिकाओं के लिए भी शिक्षकों के स्थान पर बेरोजगार युवाओं की सेवाएं लेने की सिफारिश की।
श्री साहा ने शिक्षक पात्रता परीक्षा की योग्यताओं से जुड़े उच्चतम न्यायालय के एक हालिया निर्देश पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह निर्देश उन अनेक शिक्षकों को प्रभावित कर सकता है जिनकी नियुक्ति पात्रता परीक्षा की आवश्यकताएं अनिवार्य होने से पहले हुई थी।
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