जम्मू , जुलाई 21 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को जम्मू-कश्मीर में सत्तारुढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर तीखा हमला बोलते हुए उन पर 'राजनीतिक नौटंकी' करने का आरोप लगाया और कहा कि जब जम्मू-कश्मीर हाल के वर्षों की सबसे भीषण बारिश से जुड़ी त्रासदियों से जूझ रहा था, तब पार्टी नेतृत्व नयी दिल्ली में विरोध प्रदर्शन में व्यस्त था।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इंसानियत के ऊपर राजनीति को चुना है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब केंद्र शासित प्रदेश, विशेष रूप से पुंछ और राजौरी जिलों में अचानक आयी बाढ़, बादल फटने और भूस्खलन के कारण कई लोगों की जान जा चुकी है, सत्तारूढ़ दल राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शन कर रहा था।
श्री शर्मा ने विधायक शाम लाल शर्मा और मोहन लाल भगत, पार्टी के प्रदेश इकाई के उपाध्यक्ष डॉ. शहनाज़ गनाई, महासचिव गोपाल महाजन और प्रवक्ता जोरावर सिंह जमवाल के साथ संवाददाता सम्मेलन में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, "सरकार के मुखिया के रूप में उमर अब्दुल्ला की सबसे पहली जिम्मेदारी जम्मू-कश्मीर में रहने, बचाव और राहत कार्यों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने और प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों को जुटाने की थी।"भाजपा नेताओं ने बादल फटने और बाढ़ में जान गंवाने वालों के परिजनों के लिए 20 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की। इसके अलावा उन्होंने छह महीने का राशन, प्रभावित परिवारों का तत्काल पुनर्वास, क्षतिग्रस्त धार्मिक स्थलों का जीर्णोद्धार और राजौरी जिले के झुग्गी-झोपड़ी वाले इलाकों में बाढ़ से सब कुछ गंवा चुके परिवारों के लिए अस्थायी आवास की मांग की। उन्होंने डोडा जिले के रागी नाले में पत्थर गिरने से जान गंवाने वालों और किश्तवाड़ जिले के क्यार दछन इलाके में क्षतिग्रस्त हुए मकानों के लिए भी इसी तरह के मुआवजे और राहत की मांग की।
श्री शर्मा ने बताया कि लोरन मंडी में बादल फटने की एक और घटना की खबर मिलने के बाद पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रविंदर रैना के नेतृत्व में एक टीम पीड़ितों से मिलने और स्थिति का जायजा लेने के लिए प्रभावित इलाके में पहुंच चुकी है ताकि पार्टी स्तर पर भी तुरंत राहत पहुंचाई जा सके।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा, "मुख्यमंत्री को शोकाकुल परिवारों के साथ खड़ा होना चाहिए था और दिल्ली में राजनीतिक विरोध प्रदर्शन करने के बजाय चल रहे बचाव कार्यों की निगरानी करनी चाहिए थी। आज भी पुंछ और राजौरी के बाढ़ प्रभावित इलाकों में मलबे के नीचे कई शव दबे हुए हैं, लेकिन सत्तारुढ़ दल मानवीय संकट से निपटने के बजाय राजनीतिक प्रचार में अधिक दिलचस्पी ले रहा है।"दिल्ली प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुई मुख्यमंत्री की तस्वीरों पर आपत्ति जताते हुए श्री शर्मा ने आरोप लगाया कि श्री अब्दुल्ला 'अपने बेटों के साथ तस्वीरें खिंचवाने और ई-ऑटो में सफर करने की तस्वीरें साझा करने में व्यस्त थे', जबकि जम्मू-कश्मीर के लोग तबाही से जूझ रहे थे। उन्होंने कहा कि जब लोग अपनों की तलाश कर रहे हैं, तब मुख्यमंत्री 'दिल्ली पिकनिक और फोटो सेशन' में व्यस्त हैं।
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