श्रीनगर , जुलाई 10 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) सरकार पर आरोप लगाया कि वह राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर प्रस्तावित जंतर-मंतर प्रदर्शन का इस्तेमाल अपने 'खराब प्रदर्शन' और शासन की विफलताओं से जनता का ध्यान भटकाने के लिए कर रही है।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने यहां पत्रकार सम्मेलन में आरोप लगाया कि श्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार लोगों से किये वादे पूरा करने में विफल रही है और अब वह जनता के जरूरी मुद्दों को हल करने के बजाय 'राजनीतिक नाटक' का सहारा ले रही है।
श्री शर्मा ने कहा, "जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन विफलताओं से ध्यान भटकाने की कोशिश मात्र है। यह सिर्फ छलावा है... बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और अधूरे वादों पर जवाब देने के बजाय सरकार ने नाटक का रास्ता चुना है।" उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग दो वर्ष से सत्ता में होने के बावजूद सरकार जनता को नौकरियां, मुफ्त बिजली, खाद्यान्न और अन्य कल्याणकारी उपाय प्रदान करने समेत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में विफल रही है।
उन्होंने सवाल किया, "राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए उस हस्ताक्षर अभियान का क्या हुआ, जिसका वायदा मुख्यमंत्री ने पिछले वर्ष किया था?"नेता प्रतिपक्ष ने दोहराया कि राज्य का दर्जा बहाल करना भाजपा की प्रतिबद्धता है और उन्होंने दावा किया कि इसे सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करने के बजाय संसद के माध्यम से हासिल किया जायेगा।
उल्लेखनीय है कि नेकां ने जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा तुरंत बहाल करने की मांग पर जोर देने के लिए संसद के मानसून सत्र के पहले दिन 20 जुलाई को राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है।
प्रस्तावित जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल होने के लिए नेकां के जम्मू-कश्मीर भाजपा अध्यक्ष सतपाल शर्मा को दिये गये निमंत्रण के बारे में पूछे जाने पर नेता प्रतिपक्ष ने अपनी पार्टी के शामिल होने से पूरी तरह इनकार कर दिया और नेकां नेतृत्व पर तीखा हमला बोला।
श्री शर्मा ने कहा, "हम जंतर-मंतर पर उनके साथ क्यों शामिल हों? हम इन भ्रष्ट लोगों के साथ क्यों खड़े हों...? वे अब उन लोगों को साथ ले रहे हैं, जिन्होंने अलगाववाद को बढ़ावा दिया। ये वही लोग हैं, जो वामिक और तुफैल की हत्या के लिए जिम्मेदार थे। हम उन्हें पूरी तरह से खारिज करते हैं।" उन्होंने सरकार की आउटसोर्सिंग नीति पर भी तीखा हमला बोलते हुए दावा किया कि आउटसोर्सिंग के जरिये लगभग 25,000 नियुक्तियां की गयी हैं, जिससे योग्य युवाओं को उनकी योग्यता के आधार पर मिलने वाले अवसरों से वंचित कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने विधानसभा में स्वीकार किया था कि सरकार नौकरियों की आउटसोर्सिंग कर रही है, जिसे भाजपा शिक्षित बेरोजगार युवाओं के साथ अन्याय मानती है।
श्री शर्मा ने आरोप लगाया, "युवा इस उम्मीद में वर्षों तक पढ़ाई करते हैं कि उन्हें योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी मिलेगी। सरकार की आउटसोर्सिंग नीति ने उन उम्मीदों को तोड़ दिया है और भाई-भतीजावाद तथा पिछले दरवाजे से नियुक्तियों के रास्ते खोल दिये हैं।"आउटसोर्सिंग नीति को भर्ती प्रक्रिया के बजाय एक 'नियुक्ति घोटाला' बताते हुए भाजपा नेता ने इस मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की और जांच एजेंसियों से इन कथित अनियमितताओं की जांच करने का आग्रह किया।
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