पटना , सिंतबर 22 -- ाज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की 98वीं बैठक मंगलवार को आयोजित की गई। बैठक में एसएलबीसी की 96वीं और 97वीं संयुक्त त्रैमासिक बैठक के कार्यवृत्त का अंगीकरण किया गया और उनके आलोक में तय किए गए कार्य बिंदुओं पर हुई प्रगति की समीक्षा की गई। साथ ही वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रथम तिमाही तक वार्षिक साख योजना (एसीपी) के तहत उपलब्धियों पर चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने की जबकि ग्रामीण विकास विभाग एवं सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के मंत्री श्रवण कुमार और कृषि विभाग के मंत्री विजय कुमार सिन्हा की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस दौरान प्राथमिक क्षेत्र को दिए जाने वाले ऋण, सरकार की प्रायोजित योजनाओं (पीएमइजीपी, पीएमएफएमइ, मुद्रा योजना, पीएम-स्वनिधि, पीएम-विश्वकर्मा एवं पीएम सूर्य घर बिजली योजना), एमएसएमइ एवं कृषि क्षेत्र (केसीसी फसल ऋण, डिजिटल केसीसी और कृषि अवसंरचना कोष) के वित्त पोषण का जायजा लिया गया।
बैठक में विशेष रूप से पशुपालन, मत्स्य पालन के लिए केसीसी ऋण एवं जीविका से जुड़ी स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिलाओं के बैंक लिंकेज एवं व्यक्तिगत वित्तपोषण की प्रगति पर विशेष जोर दिया गया।
इस बैठक में एनपीए, नीलाम-पत्र वादों एवं सरफेसी अधिनियम से जुड़े मामलों के त्वरित निष्पादन एवं रिकवरी से जुड़ी समस्याओं पर विचार-विमर्श हुआ। राज्य के जिलों के साख-जमा अनुपात (सीडी रेशियो) की समीक्षा करते हुए ऋण ग्राह्यता क्षमता बढ़ाने के उपाय, बिना बैंकिंग सुविधा वाले रेवेन्यू केंद्रों में नए आउटलेट खोलने, महिला बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट्स की भागीदारी बढ़ाने एवं बीसी के सामने आ रही कामकाजी चुनौतियों के समाधान पर चर्चा की गई। साथ ही राज्य में पीओएस मशीनों और बेहतर कनेक्टिविटी के जरिए डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे के विस्तार, एफएलसी/सीएफएल और स्कूली पाठ्यक्रम के माध्यम से डिजिटल वित्तीय साक्षरता बढ़ाने पर बल दिया गया।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित