पंचकूला , अगस्त 04 -- राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा ने संसद के मानसून सत्र में सिख समुदाय के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक सशक्तिकरण का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार से कौशल विकास, शिक्षा, उद्यमिता, वित्तीय सहायता और विरासत संरक्षण से जुड़ी योजनाओं की प्रगति पर जानकारी मांगी।
राज्यसभा में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने बताया कि केंद्र सरकार प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन (पीएम-विकास) योजना के तहत देश के छह अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक विकास के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि यह केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसमें कौशल विकास, उद्यमिता और शिक्षा पर विशेष जोर दिया गया है।
सरकार के अनुसार 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 59 परियोजना क्रियान्वयन एजेंसियों को 1.56 लाख लाभार्थियों के प्रशिक्षण का लक्ष्य दिया गया है। इनमें दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (डीएसजीएमसी) को 31,600 अभ्यर्थियों के प्रशिक्षण का लक्ष्य सौंपा गया है।
मंत्री ने सदन को बताया कि अब तक 32,138 अभ्यर्थियों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है, जिनमें 11,217 सिख समुदाय के लाभार्थी शामिल हैं।
सरकार ने यह भी बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम (एनएमडीएफसी) के माध्यम से 972 सिख लाभार्थियों को 15.19 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई है।
सरकार के जवाब पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि सिख समाज राष्ट्रभक्ति, सेवा, बलिदान और समर्पण का प्रतीक है तथा देश की सुरक्षा, सामाजिक सेवा और आर्थिक विकास में उसका योगदान ऐतिहासिक और प्रेरणादायी रहा है।
उन्होंने कहा कि सिख समुदाय के युवाओं, महिलाओं और उद्यमियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है, ताकि उनकी प्रतिभा को उचित मंच मिले और समुदाय की समृद्ध विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक और अधिक सशक्त रूप में पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि कौशल विकास, शिक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण के माध्यम से समुदाय को और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है।
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