नयी दिल्ली , अप्रैल 16 -- राज्यसभा ने पहले स्वदेशी प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) के प्रथम चरण की क्रिटिकलिटी हासिल करने पर दो दशकों से इस मिशन में काम कर रहे वैज्ञानिकों की तारीफ की और इसे राष्ट्रीय गौरव का क्षण बताया।
पहले चरण की क्रिटिकलिटी का मतलब यह है कि अब बिना किसी बाहरी प्रेरक के रिएक्टर में नियंत्रित नाभिकीय विखंडन निरंतर चलता रहेगा। परमाणु ऊर्जा की प्रौद्योगिकी में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है क्योंकि भारत आगे चलकर खुद का फास्ट ब्रीडर रिएक्टर बना सकेगा।
सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने गुरुवार को सदन को सूचित किया कि तमिलनाडु के कल्पक्कम में 06 अप्रैल को 500 मेगावाट के स्वदेशी पीएफबीआर ने सफलतापूर्वक प्रथम क्रिटिकलिटी प्राप्त कर ली है।
उन्होंने कहा, "यह केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय गौरव का क्षण है। दो दशकों से अधिक समय में तैयार हुई यह उपलब्धि हमारे हजारों वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, उद्योगों और परमाणु ऊर्जा विभाग की विभिन्न इकाइयों के निरंतर प्रयासों का सफल परिणाम है।"उन्होंने पूरे सदन की तरफ से इस मिशन में शामिल उन सभी वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, तकनीशियनों, उद्योग साझेदारों और सभी हितधारकों के प्रति आभार व्यक्त किया जिनकी समर्पण और कड़ी मेहनत ने इस उपलब्धि को संभव बनाया है।
श्री राधाकृष्णन ने कहा कि यह ऐतिहासिक उपलब्धि परमाणु ऊर्जा मिशन को सुदृढ़ करती है और सरकार के साल 2070 तक शून्य-कार्बन उत्सर्जन वाला राष्ट्र बनने की प्रतिबद्धता को मजबूत बनाती है।
उन्होंने बताया कि देश की परमाणु रणनीति को तीन चरणों में विकसित किया गया है, ताकि सीमित यूरेनियम और प्रचुर थोरियम भंडार का सर्वोत्तम उपयोग किया जा सके। पारंपरिक रिएक्टरों के विपरीत फास्ट ब्रीडर रिएक्टर जितना ईंधन उपयोग करता है, उससे अधिक उत्पन्न करता है। देश 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा के लक्ष्य की ओर निरंतर अग्रसर है।
सभापति ने बताया कि यह उपलब्धि पूरी तरह स्वदेशी प्रयासों से संभव हुई है। रिएक्टर का डिज़ाइन इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र द्वारा तैयार किया गया है और इसका निर्माण भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड द्वारा किया गया है, जिसमें भारतीय उद्योगों की महत्वपूर्ण भागीदारी रही है।
इसे देश की वैज्ञानिक प्रणाली की ताकत और राष्ट्रीय सहयोग की शक्ति का प्रतीक बताते हुए उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिन्होंने इस उन्नत तकनीक में महारत हासिल की है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित