पटना , जून 16 -- बिहार ग्रामीण कार्य विभाग ने राज्यभर में 38 हजार से अधिक जेब्रा क्रॉसिंग का निर्माण पूरा कर लिया है, जिससे विद्यालयों, अस्पतालों, बाजारों और अन्य संवेदनशील स्थलों के आसपास पैदल यात्रियों की सुरक्षा को मजबूती मिली है।बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित और सुव्यवस्थित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा व्यापक सड़क सुरक्षा अभियान चलाया जा रहा है।
विभाग का प्रयास केवल बेहतर सड़कों के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि पैदल यात्रियों विशेषकर विद्यार्थियों, मरीजों, वरिष्ठ नागरिकों एवं बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। इस दिशा में राज्यभर के ग्रामीण सड़कों पर सड़क सुरक्षा मानकों की सुनिश्चितता की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।
ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा अनुरक्षण अवधि के अंतर्गत आने वाले 30,955 ग्रामीण पथों के निकट विद्यालयों, अस्पतालों, बाजारों, जंक्शनों एवं अन्य संवेदनशील स्थलों की पहचान कर 38,203 जेब्रा क्रॉसिंग के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। वहीं अब तक 38,016 जेब्रा क्रॉसिंग का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है, जो निर्धारित लक्ष्य का 99.51 प्रतिशत है। वहीं कार्य की पारदर्शिता और प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए 32,596 जियो-टैग्ड एवं टाइम-स्टैम्प्ड फोटोग्राफ विभागीय पोर्टल पर अपलोड किए जा चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि केवल पिछले दो महीनों में 11,985 जेब्रा क्रॉसिंग संबंधी कार्यों का निष्पादन सुनिश्चित किया गया है।
इसके साथ ही सड़क दुर्घटनाओं को कम करने की दिशा में विभाग इंटीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डेटाबेस पर भी अत्यंत तत्परता के साथ कार्य कर रहा है। सड़क दुर्घटना से जुड़े कुल 1,068 लंबित मामलों में से 879 मामलों का सफलतापूर्वक अनुपालन किया जा चुका है। इनमें पिछले दो महीनों के दौरान ही 168 मामलों का निष्पादन किया गया है।
वहीं रात्रि के समय एवं प्रतिकूल मौसम में सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए विभाग द्वारा सड़क सुरक्षा संकेतकों के अधिष्ठापन पर भी विशेष बल दिया गया है। राज्यभर में चिन्हित 31,755 रेट्रो- रिफ्लेक्टिव संकेतक स्थलों में से 29,640 स्थलों पर रेट्रो-रिफ्लेक्टिव संकेतकों का अधिष्ठापन पूर्ण किया जा चुका है।
गौरतलब है कि पिछले दो महीनों में ही 3,055 नए संकेतकों का अधिष्ठापन किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त ग्रामीण मार्गों पर यात्रियों को बेहतर दिशा-निर्देशन उपलब्ध कराने के लिए 30,585 ग्राम नाम पट्टिकाएँ स्थापित की जा चुकी हैं, जबकि दूरी संबंधी जानकारी के लिए 34,800 किलोमीटर स्टोन एवं 200 मीटर स्टोन लगाए जा चुके हैं।
इन सड़क सुरक्षा उपायों का प्रत्यक्ष लाभ ग्रामीण क्षेत्र की जनता को मिल रहा है। विद्यालयों के आसपास जेब्रा क्रॉसिंग और सुरक्षा संकेतकों की स्थापना से बच्चों का आवागमन अधिक सुरक्षित हुआ है, वहीं अस्पतालों एवं बाजार क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था बेहतर होने से दुर्घटनाओं की आशंका में कमी आई है। इसके साथ-साथ रात्रि के समय रेट्रो-रिफ्लेक्टिव संकेतकों और दिशा-सूचक पट्टिकाओं के कारण वाहन चालकों को मार्ग पहचानने में सुविधा हो रही है। इससे सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण भी सुनिश्चित हो रहा है।
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