रायपुर , अगस्त 25 -- छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने राज्य के राज्यपाल से संबंधित आपत्तिजनक कार्टून और असमिया भाषा में अपमानजनक टिप्पणी सोशल मीडिया (फेसबुक) पर साझा करने के मामले में याचिकाकर्ताओं को सशर्त राहत प्रदान की है।
लोकभवन की शिकायत पर रायपुर के थाना सिविल लाइन में प्राथमिकी दर्ज करके आरोप लगाया गया था कि फेसबुक पर राज्यपाल के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री साझा कर संवैधानिक पद की गरिमा और प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने का प्रयास किया गया।
इस मामले में पुलिस अपनी जांच पूरी कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, रायपुर के न्यायालय में आरोप पत्र भी दाखिल कर चुकी है।
प्राथमिकी निरस्त कराने के लिए याचिकाकर्ताओं प्रणव कलिता और लक्ष्यधर राजबोंगसी ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और सुनवाई के दौरान बिना शर्त माफी मांगने तथा सोशल मीडिया से सामग्री हटाने की इच्छा व्यक्त की। राज्य सरकार की ओर से उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज गोयल ने याचिकाकर्ताओं के कृत्य का कड़ा विरोध किया। हालांकि, 19 अगस्त को याचिकाकर्ताओं के दोबारा नया माफीनामा और शपथ पत्र प्रस्तुत करने के बाद राज्य सरकार कुछ सख्त शर्तों के अधीन समझौते पर सहमत हुई।
न्यायालय ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए मामले का निस्तारण किया और स्पष्ट निर्देश दिए कि याचिकाकर्ताओं को उच्च न्यायालय के समक्ष बिना शर्त लिखित माफी देनी होगी। इसके साथ ही, जिस फेसबुक अकाउंट से मूल पोस्ट साझा की गई थी, उसी पर समान प्रमुखता के साथ माफी प्रकाशित करनी होगी और गुवाहाटी से प्रकाशित होने वाले निर्दिष्ट दैनिक समाचार पत्रों में भी माफी छपवानी होगी।
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