पटना , जून 24 -- बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सय्यद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने 'गुलमोहर मैत्री' की ओर से आयोजित ''ऑपरेशन सिंदूर'' विषयक नाट्य प्रस्तुति कार्यक्रम में भाग लिया। राज्यपाल श्री हसनैन ने इस अवसर पर कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को सही परिप्रेक्ष्य में समझने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विश्व एक नए दौर से गुजर रहा है तथा दुनिया के अनेक क्षेत्रों में संघर्ष और युद्ध की स्थितियाँ बनी हुई हैं। ऐसे समय में बदलते वैश्विक परिदृश्य और आधुनिक युद्ध की प्रकृति को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
राज्यपाल ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य अभियान नहीं था, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण संदेश भी था। इस अभियान ने यह प्रदर्शित किया कि भारत परमाणु वातावरण में भी सतत सैन्य कार्रवाई करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि भारतीय सशस्त्र बल नई तकनीकों को तेजी से अपना रहे हैं तथा आधुनिक और नवोन्मेषी तरीकों से युद्ध लड़ने की क्षमता रखते हैं। भारत किसी भी दृष्टि से पीछे नहीं है, बल्कि आधुनिक युद्ध की चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार है।
श्री हसनैन ने कहा कि आधुनिक युद्ध और सोशल मीडिया के इस युग में सूचना तथा नैरेटिव की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। सही तथ्यों और दृष्टिकोण को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना भी युद्ध का एक महत्वपूर्ण आयाम है। इस विषय में व्यापक जन-जागरूकता विकसित करने की आवश्यकता है।
राज्यपाल ने कहा कि आम जनता को ऑपरेशन सिंदूर के वास्तविक स्वरूप और महत्व की सही समझ होनी चाहिए। उन्होंने नाट्य प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम जनसामान्य में जागरूकता उत्पन्न करने तथा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को सरल एवं प्रभावी ढंग से समझाने का सशक्त माध्यम हैं।
इस अवसर पर राज्यपाल ने दक्षिण भारत क्षेत्र के पूर्व जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल एम. इंद्रबालन (सेवानिवृत्त) सहित अन्य विशिष्ट महानुभावों को सम्मानित किया। उन्होंने राष्ट्र की रक्षा में अपने प्राणों का सर्वाेच्च बलिदान देने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
कार्यक्रम को मेजर जनरल एम. इंद्रबालन (सेवानिवृत्त) तथा बिहार एवं झारखंड सब एरिया के डिप्टी जनरल ऑफिसर कमांडिंग ब्रिगेडियर अमित बेदी ने भी संबोधित किया।
कार्यक्रम में सैन्य अधिकारीगण, विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य महानुभावगण, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधिगण, एनसीसी कैडेट्स तथा अन्य लोग उपस्थित थे।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित