शिमला , मार्च 05 -- महीनों की राजनीतिक एवं वैधानिक अनिश्चितता को समाप्त करते हुए हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने शिमला नगर निगम (एसएमसी) महापौर और उप-महापौर का कार्यकाल ढाई साल से पांच साल बढ़ाने वाले संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा से पारित यह विधेयक 'हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम' में संशोधन करता है और शिमला में महापौर व उप-महापौर के कार्यकाल को राज्य के अन्य नगर निगमों के समान बनाता है। राज्यपाल की मंजूरी के साथ ही यह संशोधन अब औपचारिक रूप से कानून बन गया है।
राजभवन में मीडियाकर्मियों से बात करते हुए शिमला के महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि उन्होंने राज्यपाल शुक्ल से मुलाकात की और कानून को सहमति देने के लिए आभार जताया। श्री चौहान ने कहा कि राज्य सरकार ने नगर निगमों में महापौरों के कार्यकाल में एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए यह संशोधन पेश किया था।
श्री चौहान ने कहा, "पहले केवल शिमला नगर निगम का कार्यकाल ढाई साल था, जबकि शेष नगर निगमों का कार्यकाल पांच साल का था। यह संशोधन इस असमानता को दूर करता है और सभी आठ नगर निगमों में एकरूपता सुनिश्चित करता है।"इस मुद्दे ने राज्य में तेज राजनीतिक बहस छेड़ दी थी और यह मामला हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय तक भी पहुंचा, जहां भाजपा पार्षदों से समर्थित जनहित याचिका अधिवक्ता अंजलि सोनी ने दायर की थी, जिसमें उन्होंने महापौर के कार्यकाल विस्तार को चुनौती दी थी।
याचिकाकर्ताओं के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता सुधीर ठाकुर ने कहा कि उच्च न्यायालय ने इस मामले को 19 मार्च को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। उन्होंने कहा कि अदालत अब इस चल रहे मामले में विधेयक को मिली राज्यपाल की मंजूरी के प्रभाव की जांच करेगी।
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