शिवहर , अक्टूबर 23 -- ृषि विज्ञान केंद्र के प्रक्षेत्र पर शुक्रवार को धान की किस्म 'राजेंद्र मंसूरी-1' के बीज उत्पादन कार्यक्रम का वैज्ञानिकों ने निरीक्षण किया। इस अवसर पर डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर से डॉ. आवास अहमद, सह-प्राध्यापक, डॉ. विश्वजीत प्रामाणिक एवं डॉ. गोपीनाथ, सहायक प्राध्यापक, विशेष रूप से उपस्थित हुए। वैज्ञानिकों ने धान बीज उत्पादन प्रक्षेत्र का भ्रमण कर फसल की स्थिति का जायजा लिया तथा गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन के लिए किसानों को आवश्यक तकनीकी सुझाव दिए।कार्यक्रम के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र की वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अनुराधा रंजन कुमारी ने विश्वविद्यालय से आए वैज्ञानिकों को प्रक्षेत्र का भ्रमण कराया और केंद्र द्वारा संचालित धान बीज उत्पादन कार्यक्रम की जानकारी दी। इस अवसर पर केंद्र की वैज्ञानिक उद्यानिकी डॉ. संचिता घोष भी उपस्थित रहीं।
निरीक्षण के दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों को धान के गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने खेत में दूसरी किस्मों के पौधों एवं अवांछित पौधों को समय पर निकालने, फसल की नियमित निगरानी करने, रोग एवं कीटों का उचित प्रबंधन करने तथा बीज की शुद्धता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। इसके साथ ही फसल की उचित देखभाल, समय पर कटाई एवं मड़ाई तथा बीज के सुरक्षित भंडारण के संबंध में भी आवश्यक सुझाव दिए गए।
वैज्ञानिकों ने बताया कि बीज उत्पादन में निर्धारित वैज्ञानिक प्रक्रियाओं का पालन करने से बीज की गुणवत्ता बनाए रखने में सहायता मिलती है।
कार्यक्रम में कई प्रगतिशील किसान उपस्थित थे। वैज्ञानिकों ने उपस्थित किसानों के साथ संवाद कर उनकी कृषि संबंधी समस्याओं एवं बीज उत्पादन से जुड़े विषयों पर चर्चा की तथा वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा इस विधि से खेती करने पर किसानों की आय में वृद्धि होती है lइसके बाद सभी वैज्ञानिकों एवं किसानों ने ग्राम खैरवा दर्प स्थित किसान आलोक कुमार सिंह के कृषि प्रक्षेत्र का भ्रमण किया। वहां वैज्ञानिकों ने फसल की स्थिति का अवलोकन किया तथा धान की बेहतर पैदावार, गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन और उन्नत कृषि तकनीकों के संबंध में आवश्यक जानकारी दी। किसानों को सलाह दी गई कि वे वैज्ञानिकों द्वारा सुझाई गई तकनीकों को अपनाकर बीज की गुणवत्ता एवं उत्पादन क्षमता में सुधार लाने का प्रयास करें।
इस निरीक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को गुणवत्तायुक्त धान बीज उत्पादन के प्रति जागरूक करना, विश्वविद्यालय एवं कृषि विज्ञान केंद्र के बीच तकनीकी समन्वय को मजबूत करना तथा वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को किसानों के खेतों तक पहुंचाना था। इस प्रकार के कार्यक्रमों से किसानों को प्रत्यक्ष तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त होता है, जिससे वे आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर उत्पादन एवं आय में वृद्धि की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
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