रायपुर , फरवरी 09 -- राजिम कल्प कुंभ 2026 की तैयारियों के बीच रायपुर के संत समाज में असंतोष उभरकर सामने आया है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा जारी राजपत्र (गजट) में रायपुर के कई प्रमुख संतों और महंतों के नाम शामिल नहीं किए जाने को लेकर साधु-संतों ने नाराजगी जताई है। संत समाज ने इसे अपनी परंपरा, सम्मान और पहचान की अनदेखी करार दिया है।
रायपुर स्थित श्री सुरेश्वर महादेव पीठ में आज प्रेस वार्ता कर संतों ने आरोप लगाया कि राजपत्र में जारी सूची से रायपुर के प्राचीन मठों और अखाड़ों से जुड़े अनेक वरिष्ठ संतों के नाम हटा दिए गए हैं। संतों के अनुसार, सूची में महंत देवदास जी महाराज, महंत वेद प्रकाश, गोंडवाना समाज के संत निराहारी महाराज तथा किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर सौम्या मां सहित कई प्रतिष्ठित नाम शामिल नहीं हैं।
संतों ने कहा कि राजपत्र में बार-बार नाम काटने और जोड़ने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है, जिससे संत समाज को अपमानित महसूस हो रहा है। उनका दावा है कि इस विषय को पहले ही मुख्यमंत्री और संबंधित मंत्री के संज्ञान में लाया गया था, बावजूद इसके स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ। संत समाज ने इसे सुनियोजित उपेक्षा बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया।
संतों ने स्पष्ट किया कि जब तक नामों में हेरफेर करने वाले व्यक्ति या अधिकारी की पहचान कर उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक रायपुर के संत राजिम कल्प कुंभ में भाग नहीं लेंगे। संतों ने ऐसे व्यक्ति की तुलना 'कालनेमि' से करते हुए कठोर कार्रवाई की मांग की।
प्रेस वार्ता में संतों ने मेला प्रशासन से जुड़े एक अधिकारी के व्यवहार पर भी सवाल उठाए। संतों का आरोप है कि बातचीत के दौरान उनके साथ मर्यादित भाषा और सम्मानजनक आचरण नहीं किया गया। संतों ने याद दिलाया कि पिछले वर्ष भी इसी तरह की परिस्थितियां बनी थीं, इसके बावजूद उन्होंने आयोजन में सहयोग किया था।
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