नयी दिल्ली/जयपुर , जून 29 -- राजस्थान और हरियाणा के बीच यमुना जल समझौते पर सोमवार को हस्ताक्षर किये गये।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन और प्रयासों से राजस्थान की बहुप्रतीक्षित यमुना जल परियोजना को यह ऐतिहासिक सफलता मिली है। लगभग तीन दशक से लंबित यह परियोजना अब क्रियान्वयन के निर्णायक चरण में प्रवेश कर गयी है। लगभग 34,102 करोड़ रुपये की लागत वाली यह महत्वाकांक्षी परियोजना राजस्थान के जल इतिहास में मील का पत्थर सिद्ध होगी।

समझौते (एमओए) पर हस्ताक्षर के अवसर पर श्री शाह, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा तथा हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मौजूद थे। इस अवसर पर दोनों राज्यों एवं केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

इस मौके श्री शर्मा ने कहा कि श्री मोदी के विकसित भारत के विजन में जल सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में जल संरक्षण, जल प्रबंधन और राज्यों के बीच सहयोग की नयी कार्य संस्कृति विकसित हुई है। नर्मदा परियोजना, जल जीवन मिशन, केन-बेतवा लिंक परियोजना तथा राम जल सेतु लिंक जैसी परियोजनाओं की तरह यमुना जल परियोजना भी इसी दूरदर्शी सोच का परिणाम है।

श्री शाह के प्रति विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने दोनों राज्यों के मध्य विश्वास, संवाद और समन्वय का सेतु बनकर इस जटिल विषय का समाधान संभव बनाया। उन्होंने श्री पाटिल की तकनीकी एवं प्रशासनिक नेतृत्व क्षमता की भी सराहना करते हुए कहा कि मंत्रालय के सक्रिय सहयोग से परियोजना की सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को समयबद्ध गति मिली।

श्री शर्मा ने कहा कि श्री मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार ने यह सिद्ध कर दिया है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति, केंद्र-राज्य समन्वय और समयबद्ध निर्णयों के माध्यम से दशकों से लंबित परियोजनाओं को भी सफलतापूर्वक पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पूर्वी राजस्थान के लिए राम जल सेतु लिंक परियोजना, जल जीवन मिशन और अब यमुना जल परियोजना इसका उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

यमुना जल परियोजना के तहत राजस्थान के हिस्से का 577 एमसीएम यमुना जल हरियाणा स्थित हथिनीकुंड बैराज से लगभग 295.5 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन प्रणाली के माध्यम से चूरू जिले के हंसियावास जलाशय तक पहुंचाया जाएगा। परियोजना की अनुमानित लागत 34,102 करोड़ रुपये है।

परियोजना के तहत 3.6 मीटर व्यास की तीन भूमिगत पाइपलाइनें, निरीक्षण सड़क, कृत्रिम जलाशय तथा आधुनिक जल प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाएगी। हरियाणा में भी 10 स्थानों पर पेयजल उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है, जिससे यह परियोजना दोनों राज्यों के लिए समान रूप से लाभकारी सिद्ध होगी।

राजस्थान सरकार द्वारा परियोजना की विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार कर केंद्रीय जल आयोग के ई-पीएएमएस पोर्टल पर अपलोड की जा चुकी है तथा हरियाणा द्वारा पाइपलाइन अलाइनमेंट को सैद्धांतिक स्वीकृति भी प्रदान की जा चुकी है। परियोजना के निर्माण एवं संचालन के लिए राजस्थान हरियाणा यमुना वाटर परियोजना -एसपीवी (आरएचवाईडब्ल्यू-एसपीवी) का गठन किया जाएगा।

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