जोधपुर , फरवरी 20 -- राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार पर बजट में जोधपुर और मारवाड़ की उपेक्षा करने एवं जोधपुर के जनहित के प्रोजेक्ट्स को नज़रअंदाज किए जाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि मारवाड़ की स्थिति अलग है-जैसलमेर, बाड़मेर, फलोदी, जालौर, सिरोही और पाली-इन क्षेत्रों में अकाल और सूखे की स्थिति रही है। कई ऐसी योजनाएं थीं जिन्हें हाथ में लिया जाना चाहिए था।

श्री गहलोत शुक्रवार को जोधपुर हवाई अड्डे पर मीडिया से बातचीत में कहा कि पंचायत चुनाव होने ही हैं, स्थानीय निकायों के पंचायत चुनाव भी होने ही हैं और कांग्रेस कामयाब होगी। समय पर चुनाव होना आवश्यक था। उच्चत्तम न्यायालय और उच्च न्यायालय कई बार कह चुके हैं कि चुनाव समय पर कराए जाएं। संवैधानिक संशोधन के बाद समय पर चुनाव कराना अनिवार्य होता है लेकिन इन्हें बिना वजह लंबा खींचा जा रहा था। अब न्यायालय के आदेश के बाद उम्मीद है कि चुनाव कराना पड़ेगा।

उन्होंने कहा "मुख्य बात यह है कि जो बजट आया, उसमें जोधपुर और पूरे मारवाड़ की उपेक्षा हुई है। हमने राजीव गांधी लिफ्ट योजना के थर्ड फेज पर राज्य सरकार के खर्च से लगभग चौदह सौ करोड़ रुपये लगाए। काम शुरू हुआ, लेकिन धीमा पड़ गया। यदि मैं केंद्र सरकार के भरोसे रहता कि तुरंत फंडिंग आएगी, तब शुरू करेंगे, तो आज तक वह काम शुरू भी नहीं हो पाता। पूरे जोधपुर जिले के गांवों और आसपास के इलाकों में पीने का पानी पहुंचाना है, लेकिन उपेक्षा की जा रही है। जो काम पूरे हो चुके हैं-अस्सी करोड़ रुपये का स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट बना हुआ है, पर बंद पड़ा है और खिलाड़ियों को उसका लाभ नहीं मिल रहा। सुमेर पब्लिक लाइब्रेरी शानदार भवन बनने के बावजूद बंद पड़ी है। दिगाड़ी, प्रतापनगर, चैनपुरा और मगरा पूंजला में अच्छी इमारतें बन गई हैं लेकिन अस्पतालों में न डॉक्टर लगाए गए हैं, न उपकरण पहुंचे हैं। सरकार को इतना उपेक्षापूर्ण रवैया नहीं रखना चाहिए था।"उन्होंने कहा कि फिनटेक यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग का काम भी बहुत धीमी गति से चल रहा है। इतना बड़ा संस्थान होने के बावजूद जोधपुर की उपेक्षा क्यों की जा रही है, यह समझ से परे है। रिफाइनरी को लेकर बार-बार झांसा दिया जा रहा है। अगस्त में उद्घाटन की बात कही गई थी, फिर क्यों नहीं हुआ।

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