जयपुर , मार्च 05 -- राजस्थान विधानसभा में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने गुरुवार को कहा कि राज्य सरकार द्वारा नर्सिंग स्टाफ सहित 25 हजार विभिन्न अराजपत्रित पदों पर भर्तियां की गयी हैं और इसका सबसे अधिक लाभ जनजाति और रेगिस्तानी इलाकों को मिला है, जहां सबसे ज्यादा रिक्त पद भरे गये हैं।

श्री खींवसर प्रश्नकाल में विधायक जयकृष्ण पटेल के पूरक प्रश्नों के जवाब में कहा कि पोर्टल के माध्यम से अधिक रिक्तियों वाले क्षेत्रों में नियुक्तियां दी गयी हैं और विभाग में 25 हजार और भर्तियां की जा रही हैं। उनमें भी इन क्षेत्रों का ध्यान रखा जाएगा।

उन्होंने बताया कि विधानसभा क्षेत्र बागीदौरा में कुल 117 उप केन्द्र संचालित हैं तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या 14 है। इसी प्रकार छह सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र हैं तथा दो उप जिला चिकित्सालय संचालित हैं। उन्होंने बताया कि इन चिकित्सालयों में कुल 438 अराजपत्रित पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 303 भरे हुए हैं तथा 135 रिक्त हैं। इसी प्रकार चिकित्सकों के 50 पदों में से 30 पद भरे हुए हैं तथा 20 रिक्त हैं।

उन्होंने आश्वस्त किया कि बागीदौरा में चिकित्सा अधिकारियों के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की जांच कर कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले सदस्य पटेल के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में उन्होंने विधान सभा क्षेत्र बागीदौरा में वर्ष 2021 से 2025 तक विभाग में आयोजित समीक्षा बैठकों में लिये गये निर्णय एवं उनकी पालना की वर्तमान स्थिति का विवरण सदन के पटल पर रखा। उन्होंने विधानसभा क्षेत्र बागीदौरा में संचालित चिकित्सा संस्थानों में राजपत्रित एवं अराजपत्रित संवर्ग के स्वीकृत, कार्यरत एवं रिक्त पदों का विवरण भी सदन के पटल पर रखा। उन्होंने कहा कि रिक्त पदों को सीधी भर्ती अथवा पदोन्नति से भविष्य में भरा जा सकेगा।

जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने विधानसभा में कहा कि जालोर के जसवंतपुरा क्षेत्र में बाण्डी नदी पर निर्मित बाण्डी सणधरा बांध की कुल भराव क्षमता 1085 एमसीएफटी तथा सीसीए 6922 हैक्टेयर है। बांध से भीनमाल एवं जसवंतपुरा तहसील में 16 गांवों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता है। श्री रावत ने कहा कि बाण्डी सणधरा बांध के पूर्ण क्षमता तक भरने के बाद अधिशेष पानी स्वतः ही ओवरफ्लो होकर डाउनस्ट्रीम में नदी में ही प्रवाहित होता है। इससे नदी क्षेत्र के आसपास स्थिति कुओं का जल स्तर बढ़ाने में भी सहायता मिलती है।

श्री रावत शून्यकाल में विधायक समरजीत सिंह के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर कहा कि बांध से पानी के उपयोग के लिए मानसून बाद जल वितरण समिति बैठक कर निर्णय लेती है। वर्ष 2022 और 2023 की जल वितरण बैठकों में लिये गये निर्णयानुसार 33 प्रतिशत बांध का पानी नदी में प्रवाहित किया गया था। वर्तमान में नहरों के जीर्णोद्धार कार्य प्रगतिरत हैं। उन्होंने कहा कि बांध की भराव क्षमता का उपयोग कमांड क्षेत्र में सिंचाई के लिए निर्धारित होने से बांध में गेट का निर्माण कर नदी में छोड़ा जाना विचारधीन नहीं है। बांध निर्माण की ड्रॉइंग में गेट का प्रावधान भी नहीं रखा गया था।

विधायक के बांध का पानी सिंचाई के लिए उपयोग नहीं होने के विषय पर जल संसाधन मंत्री ने कहा कि एक जांच कमेटी गठित कर मामले का परीक्षण कराया जाएगा। उन्होंने सदन में आश्वस्त किया कि यदि गांवों में सिंचाई के लिये पानी नहीं दिया जा रहा और सूचना गलत प्रस्तुत की जा रही है, तो सम्बंधित कार्मिकों के विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी। श्री रावत ने मानसून समाप्ति के बाद बांध में उपलब्ध पानी की मात्रा की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2007 में 372 एमसीएफटी, 2008 में 353 एमसीएफटी, 2010 में 570 एमसीएफटी, 2011 में 626 एमसीएफटी, 2015 में 884 एमसीएफटी (ओवरफ्लो), 2017 में 916 एमसीएफटी (ओवरफ्लो) और वर्ष 2023 में 889 एमसीएफटी (ओवरफ्लो) पानी रहा है।

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