जयपुर , मई 01 -- राजस्थान में वन्यजीवों की गणना बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर वाटर होल पद्धति के माध्यम शुक्रवार को चौबीस घंटे के लिए शुरु हुई।

अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन प्रतिपालक के सी अरूण प्रसाद ने बताया कि वन्यजीवों की संख्या का वार्षिक आंकलन, प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी ग्रीष्म ऋतु में बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर वाटर होल पद्धति के माध्यम से किया जा रहा है और यह गणना सायं शाम पांच बजे शुरु हुई जो शनिवार सायं पांच बजे तक 24 घंटे संचालित रहेगी। इस दौरान बाघ, बघेरे (लेपर्ड) सहित समस्त वन्यजीवों की गणना की जाएगी। इस गणना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के वन क्षेत्र में वन्यजीवों की वर्तमान में संख्या का आंकलन कर भविष्य की संरक्षण एवं प्रबंधन रणनीतियों को प्रभावी बनाना है।

प्रदेश के विभिन्न संभागों में 2685 वाटर होल्स पर यह गणना की जा रही है, जिनमें जयपुर में 421, अजमेर में 236, भरतपुर में 191, उदयपुर में 744, बीकानेर में 262, कोटा में 345, जोधपुर में 482 वाटर होल्स शामिल हैं। इस कार्य में वन विभाग का प्रशिक्षित स्टाफ तथा चयनित वॉलंटियर्स भाग लेंगे।

इस अभियान के तहत राज्य के समस्त संरक्षित क्षेत्र, प्रादेशिक वनमंडल तथा वन्यजीव बहुल क्षेत्रों में, जहां जल स्रोत उपलब्ध हैं, वहां गणना कार्य किया जा रहा है। बीट को इकाई मानते हुए बीट-वार आंकलन के लिए मचान एवं हाइड स्थापित किए गए हैं, जहां वनकर्मियों, वन्यजीव प्रेमियों एवं गैर-सरकारी संगठनों के सदस्यों द्वारा वन्यजीवों की गणना की जा रही है। प्रत्येक संरक्षित क्षेत्र में वन्यजीवों की अधिक आवाजाही वाले कम से कम 10 स्थानों पर कैमरा ट्रैप के माध्यम से वन्यजीवों की पहचान एवं संख्या का आंकलन किया जाएगा।

गणना के दौरान संबंधित क्षेत्रों के उप वन संरक्षक, सहायक वन संरक्षक एवं क्षेत्रीय वन अधिकारी नियमित निरीक्षण कर इस महत्वपूर्ण कार्य के सफल क्रियान्वयन में सहयोग प्रदान करेंगे।

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