जयपुर , मार्च 30 -- राजस्थान के अस्पतालों में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) एवं इंटिग्रेटेड हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम जैसे तकनीकी नवाचारों का सफल क्रियान्वयन किया जा रहा है।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने सोमवार को बताया कि यह न केवल मरीजों को अस्पतालों में पंजीकरण से लेकर इलाज, फार्मेसी और लैब रिपोर्ट तक की सभी प्रक्रियाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़ रहा है। साथ ही उनका डेटा एक यूनिक हेल्थ आभा आईडी के माध्यम से संधारित भी हो रहा है। इससे प्रदेश के अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त करना आसान हुआ है। लोगों को अपना हेल्थ रिकॉर्ड मोबाइल पर उपलब्ध हो रहा है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन में स्वास्थ्य संस्थानों और स्वास्थ्य कार्मिकों का बड़े पैमाने पर डिजिटल पंजीकरण किया गया है। राज्य के 19 हजार से अधिक सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों एवं 24 हजार सें अधिक निजी स्वास्थ्य संस्थानों का पंजीकरण हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री में किया जा चुका है। साथ ही 85 हजार से अधिक सरकारी क्षेत्र के डॉक्टर, नर्स एवं फार्मासिस्ट का एवं निजी क्षेत्र के 16 हजार से अधिक स्वास्थ्य कार्मिकों का पंजीकरण हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री में कराया जा चुका है।

श्रीमती राठौड़ ने बताया कि डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य में 24 हजार 546 से अधिक सरकारी एवं निजी स्वास्थ्य संस्थान इस मिशन में शामिल हो चुके हैं।

उन्होंने बताया कि डिजिटल हेल्थ इंसेंटिव स्कीम में पंजीकृत स्वास्थ्य संस्थानों को हेल्थ रिकॉर्ड लिंक करने पर इंसेंटिव दिया जा रहा है। अब तक 5948 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों एवं 188 निजी अस्पताल, लैब, फार्मेसी का इस इनसेंटिव स्कीम में पंजीकरण किया जा चुका है। इस योजना के तहत डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए अब तक पंजीकृत सरकारी एवं निजी चिकित्सा संस्थानों द्वारा रुपये 19.5 करोड़ रूपए से अधिक का प्रोत्साहन अर्जित किया जा चुका है।

श्रीमती राठौड़ ने बताया कि प्रदेश के पांच हजार से अधिक राजकीय चिकित्सा संस्थानों में इंटिग्रेटेड हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम सॉफ्टवेयर संचालित किया जा रहा है, जिससे मरीजों को पंजीकरण करने एवं दवा स्टॉक संधारण और वितरण में सुविधा मिल रही है। इन अस्पतालों में एडमिशन-डिस्चार्ज मॉड्यूल प्रारंभ भी किया जा रहा है, जिससे अस्पतालों में मरीजों की भर्ती एवं डिस्चार्ज की जानकारी डिजिटल रूप से उपलब्ध हो रही है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डाॅ. अमित यादव ने बताया कि एबीडीएम एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जहां मरीज, डॉक्टर और अस्पताल एक-दूसरे से डिजिटल रूप से जुड़े होते हैं। योजना के तहत पंजीकृत नागरिक की एक 14 अंकों की यूनिक आभा हेल्थ आईडी बनती है, जो रोगी की पहचान और मेडिकल रिकॉर्ड का आधार होती है। सभी लैब रिपोर्ट्, दवाइयों के पर्चे और पुरानी बीमारियों का डेटा इस आईडी में सुरक्षित रहता है, जिससे कागजों को साथ रखने की जरूरत खत्म हो जाती है। रोगी का पूरा डेटा सुरक्षित होता है और उसकी अनुमति के बिना कोई भी डॉक्टर या अस्पताल इसे नहीं देख सकता। इससे डॉक्टरों को मरीज की पुरानी मेडिकल हिस्ट्री समझने में आसानी होती है, जिससे सही समय पर सही इलाज मिल पाता है।

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