जयपुर , जुलाई 17 -- राजस्थान में सघन अभियान के दौरान चिह्नित प्रत्येक उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिला की नियमित जांच की जा रही है और आवश्यकता अनुसार उच्च चिकित्सा संस्थान में भेजकर कर सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने के प्रयास बढ़ाये जा रहे हैं।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड के निर्देश पर विभाग द्वारा प्रदेश में गत 15 जुलाई से पांच दिस तक संचालित ''सघन मातृ स्वास्थ्य सेवा अभियान'' की समीक्षा एवं फील्ड स्तर पर सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को भी जनस्वास्थ्य निदेशक डॉ. रवि प्रकाश शर्मा की अध्यक्षता में स्वास्थ्य भवन से बैठक हुई, जिसमें अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।बैठक में सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रम से जुड़े अधिकारी, जिला एवं प्रखंड स्तर के संबंधित अधिकारियों ने भाग लिया।

डॉ. प्रकाश ने बताया कि प्रदेश के प्रखंड स्तर तक के अधिकारियों के लिए बैठक आयोजित कर उनसे संचालित विशेष अभियान के दौरान गर्भवती महिलाओं के लिए प्रभावी प्रसवपूर्व जांच (एएनसी) सेवाओं, उच्च जोखिम गर्भावस्था की पहचान, ट्रैकिंग, रेफरल, उपचार तथा संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने के लिए किए गए प्रयासों की विस्तृत जानकारी ली गयी और आवश्यक दिशा-निर्देश दिये है।

उन्होंने बताया कि बैठक में फील्ड स्तर पर कार्यरत चिकित्सा अधिकारियों, एएनएम, आशा सहयोगिनियों और अन्य स्वास्थ्य कार्मिकों को मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, समयबद्ध सेवा प्रदायगी एवं लाभार्थी आधारित निगरानी के संबंध में संवेदनशील किया जा रहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि शनिवार को राजकीय स्वास्थ्य संस्थानों में आयोजित होने वाले प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिसव पर कोई भी पात्र गर्भवती महिला प्रसवपूर्व जांच एवं आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रहे।

उन्होंने बताया कि अभियान अवधि में प्रतिदिन सायं आयोजित होने वाली इन वी.सी. बैठकों के माध्यम से सभी गर्भवती महिलाओं का यथासमय पंजीकरण, निर्धारित एएनसी जांच, हीमोग्लोबिन, रक्तचाप, रक्त शर्करा एवं अन्य आवश्यक जांच, आयरन-फोलिक एसिड एवं कैल्शियम की उपलब्धता, टीकाकरण, पोषण एवं जन्म तैयारी संबंधी परामर्श तथा उच्च जोखिम गर्भावस्था की डिजिटल एवं भौतिक ट्रैकिंग इत्यादि कार्यों में विशेष गंभीरता बरतने के निर्देश दिये गये हैं।

उन्होंने निर्देश दिए कि अभियान के दौरान चिह्नित सभी उच्च जोखिम के मामलों की नियमित निगरानी की जाए, संभावित प्रसव तिथि के अनुसार प्रसव की अग्रिम योजना बनाई जाए और प्रत्येक गर्भवती महिला का सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित किया जाए साथ ही आशा-एएनएम के माध्यम से घर-घर संपर्क कर छूटी हुई गर्भवती महिलाओं को भी स्वास्थ्य संस्थानों तक लाने के निर्देश दिए गए।

विभाग ने अपील की है कि सभी गर्भवती महिलाएं निकटतम राजकीय स्वास्थ्य संस्थान पर नियमित प्रसवपूर्व जांच अवश्य कराएं तथा चिकित्सकों की सलाह के अनुसार आवश्यक जांच एवं उपचार प्राप्त कर सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करें।

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