जयपुर , अगस्त 10 -- राजस्थान सरकार और कृषि विभाग द्वारा उर्वरकों की दैनिक उपलब्धता पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और कम उपलब्धता और अधिक खपत वाले जिलों एवं ब्लॉकों को चिह्नित कर प्रदेश भर में प्राथमिकता के साथ पूर्ण पारदर्शिता से उर्वरकों का वितरण किया जा रहा है। कृषि मंत्री डॉ किरोडी लाल मीणा ने बताया कि उर्वरकों की कालाबाजारी एवं जमाखोरी रोकने के लिए कृषि विभाग के अधिकारी प्रदेश भर में पूर्ण सतर्कता से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा निरंतर केंद्र सरकार से समन्वय स्थापित कर प्रदेश की मांग अनुसार उर्वरकों की आपूर्ति कराई जा रही है।
राज्य के किसानों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए खरीफ 2026 में अप्रैल से अगस्त तक केन्द्र सरकार द्वारा आवंटित नौ लाख 28 हजार टन यूरिया के विरुद्ध एक अप्रैल को उपलब्ध स्टॉक सहित वैश्विक संकट होने के बावजूद भी अब तक 12 लाख 29 हजार टन (132 प्रतिशत) की उपलब्धता की गयी है, एवं अगस्त की शेष अवधि में एक लाख 33 हजार टन यूरिया की ओर आपूर्ति करवायी जायेगी।
इसी प्रकार खरीफ 2026 में अप्रैल से अगस्त तक केन्द्र सरकार द्वारा तीन लाख 80 हजार टन डीएपी की मांग के विरुद्ध गत एक अप्रैल को उपलब्ध स्टॉक सहित अब तक दो लाख 92 हजार टन की उपलब्धता की गयी है। देश में आयातित डीएपी की आपूर्ति मध्य एशिया युद्ध होने के कारण बाधित रही है। अगस्त की शेष अवधि में एक लाख टन डीएपी की ओर आपूर्ति सुनिश्चित करायी जायेगी। डीएपी की कम आपूर्ति होने से डीएपी के वैकल्पिक उर्वरक एक लाख 49 हजार टन एनपीके एवं तीन लाख 50 हजार टन एसएसपी की उपलब्धता करायी गयी। इस प्रकार कृषकों को मांग अनुसार फास्फेटिक उर्वरक सात लाख 91 हजार टन उपलब्ध कराये गये हैं।
डॉ. मीणा ने बताया कि राज्य में कृषकों को अनुदानित उर्वरकों की उपलब्धता एवं पारदर्शी वितरण के लिये उर्वरक विक्रय की नवीन ऑनलाइन डिजिटल प्रणाली राज्य के सिरोही एवं राजसमंद जिलों में पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में चालू की गयी है, जिसमें अब तक 68 हजार कृषकों ने 10 हजार टन उर्वरक क्रय किये है।
नयी प्रक्रिया में कृषक बिना लाइन में लगे खेत से ऑनलाइन बुकिंग कर क्यू.आर.कोड से बोई गयी फसल की वैज्ञानिक सिफारिश अनुसार उर्वरक क्रय करने की सुविधा दी गयी है। नयी प्रणाली से डीलर की मनमानी, कालाबाजारी, टैगिंग एवं डायर्वजन पर प्रभावी रोक लगेगी। यह नवीन प्रणाली शीघ्र ही राज्य के अन्य जिलों में भी प्रारम्भ की जायेगी।
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